लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

राजनीति रिपोर्ट

आरएसएस का असली सच, ‘आपका ध्‍यान किधर है? असली टुकड़े-टुकड़े गैंग इधर है’

मुझे नहीं पता कि किसकी सबसे ज्‍यादा सीटें आएंगी। मैं नहीं जानता कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी। मुझे ये भी नहीं पता कि मेरी लोकसभा में सीट कौन निकाल रहा है। इस चुनाव का मुझे ‘च’ भी नहीं समझ आ रहा क्‍योंकि लोग ‘’च्‍च्‍च्‍च’’ तक नहीं कर रहे। भयंकर सन्‍नाटा है टीवी और मोबाइल के बाहर की दुनिया में। मेरे पास किसी सवाल का जवाब नहीं है। केवल एक बात मैं तयशुदा तौर पर महसूस कर रहा हूं और काफी ठोकने बजाने के बाद अब कहने की स्थिति में हूं। इसे सनद रख लें। बाद में काम आएगी।

यह चुनाव न भाजपा के लिए निर्णायक है, न कांग्रेस के लिए और न ही किसी दूसरे दल के लिए। यह चुनाव जनता के लिए भी निर्णायक नहीं है, न ही देश के लिए। यह चुनाव केवल और केवल राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के लिए निर्णायक है। जीत किसी की भी हो, यह चुनाव ‘’सांस्‍कृतिक संगठन’’ आरएसएस के ताबूत में आखिरी कील साबित होने जा रहा है। जिसे पैराडाइम शिफ्ट कहते हैं, उसका गवाह बन रहा है ये चुनाव। मुहावरा पलट गया है- कभी कहते थे कि बिना संघ के भाजपा कुछ नहीं है, आज की हकीकत ये है कि भाजपा है तो संघ है। संघ ने पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के धनबल और नेतृत्‍व-प्रभाव के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया है। ऐसा अनजाने नहीं हुआ, संघ के शीर्ष स्‍तर पर स्‍वेच्‍छा से लिया गया सचेतन निर्णय है।

भाजपा ने अपना खज़ाना खोल दिया है। संघ के काडरों का मुंह खुला हुआ है। साइकिल से चलने वाला प्रचारक फॉर्चूनर पर आ गया है। सांसद प्रत्‍याशी के इर्द-गिर्द घूम रहा है। सुविधाभोगी हो गया है। झण्‍डेवालान परिसर में जाकर देखिए समझ आ जाएगा, संघ के मुंह में पैसे का खून लग चुका है। अब वह परदे के पीछे काम करने वाला सांस्‍कृतिक संगठन नहीं रह गया है। आज का प्रचारक सामने खुलकर, आरएसएस लिखी टीशर्ट पहनकर, देसी चेग्‍वारा बना फिर रहा है। उसे समझ में आ चुका है कि बिना उत्‍पादन किए जिंदगी कैसे हरामखोरी से काटी जाती है। अब यह सिलसिला रुकने वाला नहीं। यह संघ को ले डूबेगा।

आप अपने क्षेत्र की शाखाओं और प्रचारकों के साथ एकाध भाजपा उम्‍मीदवारों के प्रचार में टहल आइए, आपका नतीजा इससे उलट नहीं होगा। 2014 के बाद सत्‍ता की राजनीति और मातृ संगठन की विचारधारा के बीच जो टकराव शुरू हुआ था, वह अब मुकम्‍मल हो चुका है। अब संघ का काडर पेड प्रचारक है। इसका असली परिणाम देखना हो तो 2022 तक दम थामे रखिए। अब तक भाजपा वाले कांग्रेस में जाते दिखे हैं, कल संघ का प्रचारक वहां जाएगा जहां उसकी सही कीमत लगेगी। एबसर्ड के थिएटर में केवल एक विचारधारा खतरे में नहीं होती, सभी होती हैं। सामाजिक निष्‍ठा का लोप सारे वैचारिक संगठनों को ले डूबता है। संघ अपवाद नहीं होना चाहिए।

सवाल उठता है कि फिर हिंदू राष्‍ट्र बनाएगा कौन? मेरे खयाल से कोई नहीं। जिस तरह सीपीआइ, सीपीएम, माले सर्वहारा की तानाशाही स्‍थापित नहीं कर सकते ठीक उसी तरह भाजपा हिंदू राष्‍ट्र नहीं बना सकती। फिर सवाल उठता है भाजपा क्‍या बनाएगी? याद रहे, भाजपा का जन्‍म तोड़ने से हुआ है। उसकी पैदाइश में ही विध्‍वंस है। उसे कुछ भी बनाना नहीं आता। बनाने का आर्गुमेंट ही उसे नहीं आता है। इसलिए विकृत और पथच्‍युत संघ वाली भाजपा केवल तोड़ेगी। जितना तोड़ा है, उससे ज्‍यादा और तेजी से तोड़ेगी। आपका ध्‍यान किधर है? असली टुकड़े-टुकड़े गैंग इधर है।

आरएसएस पर एक दूसरा नज़रिया यह भी

लेकिन अभिषेक श्रीवास्तव के इस विश्लेषण से विनय सुल्तान सहमत नहीं दीखते। सुल्तान लिखते हैं, संघ यह समझता है कि ‘हिन्दू’ राजनीतिक पहचान के तौर पर जितना मजबूत होगा, उसकी जड़े उतनी ही गहरी होंगी।

पिछले पांच साल में संघ ने अपने काम करने के तरीके को बदला है।
पहले होता यह था कि आप शाखा जाते थे। संघ शिक्षा वर्ग में शामिल होते थे। फिर आपको अनुषांगिक संगठनों की जिम्मेदारी दे दी जाती थी। अब ऐसा नहीं है। अब चाहे आप शाखा जाते हो या नहीं, आपने संघ शिक्षा वर्ग किया है या नहीं आपको अनुषांगिक संगठनों की जिम्मेदारी मिल रही है।

एक मोहल्ले में संघ ने 14 अलग-अलग संगठन खड़े किए हैं। इसमें गौ रक्षा, लव जिहाद नियंत्रण जैसे संगठन हैं। ये आपको जमीन पर बहुत सक्रिय नहीं दिखाई देते। संघ की शाखाओं में भी संख्या घट रही है। लेकिन लोगों के बीच संघ की घुसपैठ बढ़ी है। यह काम बहुत सधे हुए ढंग से चल रहा है।

दूसरा ऑनलाइन माध्यमों की वजह से प्रचार का व्याकरण भी बदला है। यह पहले से ज्यादा टार्गेटेड है। सटीक है। हम और आप इसके लक्षित समूह नहीं है, इस वजह से इसके फैलाव से भी बेखबर हैं। हिंदुत्व का जो मास हिस्टीरिया 2014 में खड़ा होना शुरू हुआ था वो अब मोदी के नियंत्रण से बाहर है। संघ जब चाहे तब मोदी को हिन्दू विरोधी साबित करके किनारे लगा सकता है। 2004 में अटल के साथ वो यह कर चुका है। उस समय संघ की प्रचार मशीन ने अंदर ही अंदर अटल को गाय की जीभ खाने वाला साबित कर दिया था।

संघ अब भी सत्ता का केंद्र है। जिस दिन नरेंद्र मोदी की उपयोगिता खत्म होगी, मार्गदर्शक मंडल में उनके लिए सीट खाली कर दी जाएगी।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *