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इस बार अगर विपक्षी दल समझदारी से चुनाव लड़ें तो भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं

उर्मिलेश

देश‌ के सबसे बड़े राज्य यूपी सहित कुछेक राज्यों में जाने और लोगों से मिलने-जुलने का पिछले दिनों मौका मिला! फिर निकलने वाला हूं।

जनता और नेताओं के रुझान और आकलन में साफ फर्क नजर आ रहा है! सन् 2014 के मुकाबले आज की सियासी तस्वीर बिल्कुल अलग दिख रही है। जनता का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार के कामकाज से खुश तो दूर की बात रही, कत्तई संतुष्ट नहीं हैं! मोदी सरकार की सिर्फ दो योजनाओं का कुछेक राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ असर है: ये हैं आवास बनाने के लिए सीधे रकम(एक लाख या उससे कुछ ऊपर) का भुगतान और दूसरी उज्ज्वला योजना! पर उज्ज्वला सिर्फ शुरुआत में अच्छी लगी। बाद के दिनों, महंगे सिलिंडर ने उसका असर फीका कर रखा है!

दलित, आदिवासी और ओबीसी का बहुत बड़ा हिस्सा भाजपा और मोदी की जबर्दस्त मुखालफत कर रहा है। अगर विपक्षी खेमे ने इन समुदायों के वोटों को अपने-अपने निजी स्वार्थों के चलते बांटा नहीं तो यक़ीनन भाजपा की डगर बहुत मुश्किल ही नहीं, लगभग नामुमकिन हो जायेगी।

दलित-आदिवासी-ओबीसी के बीच भाजपा और मोदी सरकार की बढ़ते विरोध के पीछे असल कारण हैं: नौकरियों, ठेकों और अन्य कार्यों में भारी भेदभाव, आरक्षण के प्रावधानों में असंवैधानिक फेरबदल, लगातार बढ़ता सामुदायिक उत्पीड़न, खेती की बर्बादी, आवारा पशुओं का अभूतपूर्व उपद्रव और भाजपा नेताओं की फालतू भाषणबाजी।

अचरज की बात है कि भाजपा अपनी सियासी मुश्किलों के प्रबंधन में जी-जान से जुट गई है लेकिन विपक्षी दल अभी तक अपनी एकजुटता भी सुनिश्चित नहीं कर सके हैं। कुछ प्रमुख दलों के कथित चुनावी सलाहकार (जो विदेश में पढ़े या प्रशिक्षित गैर-राजनीतिक प्रोफेशनल बताये जाते हैं!) अपने-अपने नेताओं को भाजपा और मोदी की शक्ति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में कामयाब हो रहे हैं। इससे विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और व्यापक एकजुटता का जरुरी एजेंडा भी प्रभावित हो रहा है। भाजपा और मोदी के लिए विपक्षी खेमे के ऐसे सलाहकार बहुत मददगार साबित हो रहे हैं।

पश्चिम यूपी के कुछ अर्द्धशहरी और ग्रामीण हलकों में तरह-तरह के लोगों से बातचीत कर रहा था। कई सवालों में एक सवाल सबसे पूछा: ‘प्रधानमंत्री जी ने अभी सैटेलाइट वाले मामले में जो राष्ट्र के नाम संदेश दिया, उसके बारे में आप लोगों की क्या राय है?’ नब्बे फीसदी से ज्यादा लोगों का जवाब था: ‘हम तो समझे पाकिस्तान से लड़ाई छिड़ गई या कोई सर्जिकल स्ट्राइक हो गई। पर मोदी जी ने जो बताया, वह अपने पल्ले नहीं पड़ा! बस अंदाज लगाया कि पराक्रम जैसा कुछ हुआ है, गर्व करने लायक!’
इसलिए बीबीसी हिन्दी का यह कार्टून मुझे स्टीक लगा!
(कार्टून: साभार बीबीसी हिन्दी)

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