लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

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हम अंतिम दिनों वाले गांधी को याद करने से क्यों डरते हैं?

प्रोफेसर अपूर्वानंद 30 जनवरी को गांधी की शहादत का दिन कहा जाता है. बेहतर इसे गांधी की हत्या का दिन ही कहा जाना होता. लेकिन शायद हत्या को नकारात्मक और शहादत को सकारात्मक मानकर ही दूसरे शब्द को कबूल किया…

क्या दीपक चौरसिया को रोकना पत्रकारिता पर हमला है?

दिलीप खान दीपक चौरसिया को रोका गया. उसके चैनल ने दिखाया पीटा गया. लोगों ने लिखा पत्रकारिता पर हमला हो गया. शाहीन बाग़ में बीते महीने भर से तमाम पत्रकार गए और रिपोर्टिंग करके लौटे. सब अलग-अलग विचारधारा के लोग…

मुख्यमठी

मोबीन भाई एक मूडी शख्स ने बचपन चय्याशी की नज़्र कर दी. बड़ा हुआ शादी हुई पर भाग खड़ा हुआ. उस महिला का जीवन कितना दर्दनाक होगा जिसे जन्म जन्म के बंधन में बांध दिया गया और एक भी जन्म…

गृह मंत्री जी, सरकार CAA पर एक इंच पीछे हटे भी कैसे? पीछे गड्ढे में अर्थव्यवस्था औंधे मुँह पड़ी है!

गुरदीप सप्पल गृह मंत्री ने कहा है कि सरकार CAA पर एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। कैसे हटे? क्योंकि पीछे एक बड़ा गड्ढा जो है, जिसमें अर्थव्यवस्था लुड़की हुई, औंधे मुँह पड़ी है। ज़रा देखें: GST का कलेक्शन ₹1.2…

ग़रीबों-मज़दूरों की थाली से रोटियाँ ग़ायब, पर गोदी मीडिया में ग़रीब ही ग़ायब!

अनुपम जुलाई 2019 में आयी विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग अल्पपोषित हैं, यानी देश के हर छठे व्यक्ति को मनुष्य के लिए ज़रूरी पोषण वाला भोजन नहीं मिलता। इसी तरह…

व्लादिमीर लेनिन की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनका लेख: हड़तालों के विषय में

व्लादिमीर लेनिन इधर कुछ वर्षों से रूस में मजदूरों की हड़तालें बारम्बार हो रही हैं। एक भी ऐसी औद्योगिक गुबेर्निया नहीं है, जहाँ कई हड़तालें न हुई हों। और बड़े शहरों में तो हड़तालें कभी रुकती ही नहीं। इसलिए यह…

देश की औरतें जब बोलती हैं तो शहर-शहर शाहीन बाग हो जाते हैं

शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन को एक महीने से ज़्यादा वक्त बीच चुका है। इस बीच दिल्ली के पारे का रिकॉर्ड कई बार टूटा, सत्ता का दमनचक्र कई बार आक्रामक हुआ, आंदोलन को भटकाने की कई बार कोशिश की…

हिंदुस्तान की कहानी: मतिबर रहमान के शंकर भगवान

भारत के पूर्वोत्तर का राज्य असम। वही असम जहां से हमारी सरकार ने हिंदू-मुस्लिम छांटना शुरू किया है। यहां गुवाहाटी में एक गांव है रंगमहल। गांव में भगवान शिव का एक मंदिर है। बताते हैं कि मंदिर 500 साल पुराना…

छपाक रिव्यु: चीख़ में छिपी भाषा भविष्य में सामने आयेगी जब एक संवेदनशील समाज होगा

शुभा “छपाक” इस मायने में एक साहसिक फिल्म है कि यह हिन्दी फिल्मों और समाज में दूर तक छाई हुई उपभोक्तावादी सौंदर्यदृष्टि को किनारे करती है. एक हस्तक्षेपकारी मनुष्य -दृष्टि से काम लेते हुए यह सुन्दरता के प्रति मौजूद रूढ़…