लोकवाणी

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छपाक रिव्यु: चीख़ में छिपी भाषा भविष्य में सामने आयेगी जब एक संवेदनशील समाज होगा

शुभा “छपाक” इस मायने में एक साहसिक फिल्म है कि यह हिन्दी फिल्मों और समाज में दूर तक छाई हुई उपभोक्तावादी सौंदर्यदृष्टि को किनारे करती है. एक हस्तक्षेपकारी मनुष्य -दृष्टि से काम लेते हुए यह सुन्दरता के प्रति मौजूद रूढ़…

देश की जनता को उलझाने के लिए बीजेपी का अगला दाँव है जनसंख्या नियंत्रण कानून

‘देशभक्ति सिलेबस का ‘जनसंख्या कानून’ एक ऐसा चैप्टर है जिससे अच्छे से अच्छा मोहित हो जाए. विपक्ष के पास भी इसके विरोध में खास तर्क नहीं हैं. ये ऐसा इकतरफा मुद्दा है जिसमें मोदी-शाह की इकतरफा जीत तय है. लेकिन…

देविन्दर सिंह बड़े गेम का बस मोहरा था

देविन्दर सिंह को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं, उठाए जा रहे हैं। मेरा मानना है कि जो सवाल उठाए जा रहे हैं सचमुच बहुत ही कम है। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि मामला इतना…

रोहित वेमुला का आखरी खत: ‘मनुष्य को कभी एक मस्तिष्क की तरह बरता ही नहीं गया’

रोहित वेमुला के आखिरी ख़त का अनुवाद – जब आप यह ख़त पढ़ेंगे, उस वक़्त मैं यहां नहीं रहूंगा। मुझ पर नाराज़ न हों। मुझे पता है कि आप में से कुछ लोग वाकई मेरी परवाह करते हैं, मुझ से प्यार…

“मैं प्रेम में भरोसा करती हूं. इस पागल दुनिया में इससे अधिक और क्या मायने रखता है?”

एलिज़ाबेथ वुर्टज़ेल के शब्दों में उनकी मौत से पहले बीता वक्त टूटी शादियों वाली इस अस्तव्यस्त धरती से मेरा सलाम. यह सराय अब टूटकर बिखर रहा है. चीज़ें हवा में तैर रही हैं चारों दिशाओं में. जो चीज़ उन्हें जोड़ती…

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

गुजरात का अमरेली जिला. सावरकुंडला कस्बे में एक थे भीखू कुरैशी. उनके दोस्त का नाम था भानुशंकर पांड्या. दोनों की दोस्ती आज से करीब 40 साल पहले हुई थी. जीवन की गाड़ी आगे बढ़ी. दोनों का वक्त एक जैसा नहीं…

नागरिकता क़ानून-एनआरसी पर प्रदर्शन में कौन ढूंढ रहा है हिंदू-मुसलमान?

प्रोफेसर अपूर्वानंद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों पर हुए हमले से पैदा हुई राष्ट्रीय उत्तेजना और विक्षोभ ने कुछ समय के लिए नागरिकता संबंधी क़ानून और नागरिकता के लिए पंजीकरण के ख़िलाफ़ चल रहे राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध की ओर से ध्यान…

आज विवेकानंद को नये कट्टर हिन्दूत्व के दार्शनिक योद्धा के रूप में बदल दिया गया है

आशुतोष कुमार पांडेय दोनों हाथों को मोड़कर छाती से सटाये और नेपोलियन की तरह टकटकी लगाकर कठोर मुद्रा बनाये स्वामी विवेकानंद हिन्दू धार्मिक प्रथाओं में दमन देखकर मानसिक वेदना के कारण विक्षिप्तता की ओर बढ़ रहे थे।विवेकानंद को निजी प्रेरणा…

सौ साल पुरानी क्रोनोलॉज़ी: जेएनयू हिंसा में शामिल अपने कार्यकर्ताओं से ABVP ने पल्ला झाड़ा

ये क्रोनोलॉजी सौ साल पुरानी है. एक आरएसएस है. उसके एक स्वयंसेवक थे नाथूराम गोडसे. गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी. पकड़े गए. आरएसएस ने कहा कि कुछ समय पहले तक हमसे जुड़े थे, लेकिन अब हमारे नहीं…

‘I am worried about the way this Government has been functioning’

Sharad Yadav I condemn the idea of the Government for unification of services in the Railways with the basic objective of ending departmentalism. It is not a well thought and well perceived decision. Every organization is bound to have departments…