लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

Latest post

मीडिया आजाद है!

पुण्य प्रसून वाजपेयी न कोई मीडिया मुगल है, न ही मीडिया की अपनी कोई ताकत बची है। रेंगते लोकतंत्र के साथ मीडिया का रेंगना उसके वजूद को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, जहां लोकतंत्र को घुटने के बल…

एक बार फिर 20 जुलाई को किसान क्यों करेंगे ट्रैक्टरों के साथ सरकार का घेराव

संदीप सिंगरोहा सरकार द्वारा किसान विरोधी तीन अध्यादेशों के खिलाफ हरियाणा-पंजाब के किसान 20 जुलाई को ट्रैक्टरों के साथ विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। ट्रैक्टर आन्दोलन में भाग लेने के लिए छोटे बड़े हर किसान से सहयोग की…

‘पोस्ट कोरोना वर्ल्ड’ की मार्च-अप्रैल कालीन परिकल्पनाओं का जुलाई आते-आते शीराज़ा बिखरने लगा है

बीते मार्च महीने में, जब कोरोना संकट दुनिया के लगभग तमाम देशों को अपनी चपेट में ले चुका था, एक बहस चलनी शुरू हुई थी कि ‘पोस्ट कोविड-19 वर्ल्ड’ का स्वरूप कैसा होगा। हालांकि, अब जब…जुलाई आधा बीतते दुनिया के…

“सावधान! आगे भावनाएँ आहत हो रही हैं!”

लेखक: रविन्द्र चौधरी उर्फ भगतराम देश के सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ चैनल (?) पर देर रात तक शनि और मंगल के घर में आ घुसने की ख़ौफ़नाक न्यूज़ देखने के बाद डरते-डरते मेरी आँख लगी ही थी कि अचानक कानों में ज़ोर…

#जीवनसंवाद: आत्महत्या के विरुद्ध होना क्यों जरूरी!

सुशांत सिंह के साथ खड़े होने से बचिए! हमें आत्महत्या के विरुद्ध होना है. उसके साथ नहीं.हमारी समस्या यह है कि हम जीवित व्यक्ति के साथ कभी समय पर खड़े नहीं होते, लेकिन मातम के वक्त समय पर पहुंच जाते…

बेटा-बेटी, जवांई, नाती क्या, एक कुनबा काम न आएगा..

वशीम अली माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था। किसी से साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था ! अपनी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर…

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया. इन्हें मध्य प्रदेश के शाजापुर सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पांच दिन भर्ती रहे. परिजनों ने दो बार में 11 हजार…

नागरिक को अर्द्ध नागरिक में बदलता समय

चंदन श्रीवास्तव लॉकडाऊन के सवा दो माह गुजरने के बाद जब कोई सवाल ये पूछे तो कि देश ने क्या खोया-क्या पाया तो एक खस्ताहाल आम नागरिक का और क्या जवाब होगा भला सिवाय मी’र के इस शे’र के कि…

लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए 10 करोड़ लोगों को सरकार ने राम भरोसे छोड़ दिया

महामारी एक है। जर्मनी और अमरीका एक नहीं हैं। रोज़गार और बेरोज़गारी को लेकर दोनों की नीति अलग है। जर्मनी ने सारे नियोक्ताओं यानि कंपनियों दफ्तरों और दुकानों के मालिकों से कहा कि उनके पे-रोल में जितने भी लोग हैं,…

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की मौत, श्रमिक एक्सप्रेस के भूखे यात्रियों से लुटती दुकानों को देख घबराए वेंडर

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है! -लल्लनटॉप, श्रमिक ट्रेनों में सफर करने वाले 80 मज़दूरों की अब तक जान जा चुकी है. 9 से 27 मई के बीच. ये जानकारी मिली है रेलवे प्रोटेक्शन…