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देवांगना व नताशा की गिरफ्तारी: देश की होनहार, पढ़ी-लिखी, लड़ाकू लड़कियां जेलों में भरी जा रही हैं

जया निगम

इमरजेंसी में कितने लोग जेल में डाले गए थे, हिसाब है किसी के पास? पर एंटी सीएए प्रोटेस्ट वाली लिस्ट बढ़ती जा रही है. लॉक डाउन से पहले पूरे देश से 3000 लोग गिरफ्तार कर लिए गए और लॉक डाउन के दौरान, 800 लोगों से ज्यादा की गिरफ्तारी होने के बाद भी ये लिस्ट बढ़ती जा रही है.

आज़ादी के बाद पहली बार, देश का सबसे शांतिपूर्ण आंदोलन लगभग सारे राज्यों में हुआ. देश के बहुमत द्वारा, देशद्रोही माने जाने वाले मुसलमान और उसमे भी औरतों ने इसकी लीडरशिप संभाली. ये इतनी बड़ी बात थी कि सारी जगहों कि खबरों को देश भर के मीडिया पर नियंत्रण के जरिए, जगह जगह इंटरनेट कंट्रोल कर एक दूसरे से काट दिया गया.

फिर भी एंटी सी ए ए प्रोटेस्ट ने सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ खूब मोर्चा खोला, हिन्दू मुस्लिम के बीच जो लगातार खाई बनाई जा रही है, उसे खूब चुनौती दी, पूरे देश का युवा जो इस समय भयानक तनाव में है, इससे अपना जुड़ाव महसूस कर रहा था.

उसी समय ये महामारी आई, पूरा देश तालाबंदी में चला गया, जिससे इस खूनी वायरस को रोका जा सके, मगर हमारे देश की सरकार को रोकने वाला कोई नहीं, उसने चुन चुन कर उन युवा और अनुभवी नेताओं को जेल के भीतर डाला जो कैसे भी करके सारी की सारी नीतियों का विरोध लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके सड़कों में करना चाहते थे.

इस लिस्ट में बहुत सारी एक्टिविस्ट औरतें और लड़कियां भी थीं, वो भी उठा कर जेल में डाली गई, बिना प्रेग्नेंसी के रूल फॉलो किए भी एक लड़की सफ़ूरा जो गर्भवती थी, उसे भी जेल में डाल दिया गया, उसे जेल गए चार महीने से ऊपर हो रहे.

कल शाम #pinjratod की कार्यकर्ता देवांगाना और नताशा भी जेल में डाल दी गईं. जो दिल्ली के सबसे पिछड़े इलाके में इस प्रोटेस्ट को संचालन कर रही थीं. पिंजरतोड लगातार देश के मजदूर आंदोलन और छात्रा आंदोलन खासकर, देश में विभिन्न रूपों में फैले नारीवादी आंदोलन को एक दूसरे से जोड़ना चाहती थीं.

इस देश की सबसे होनहार, सबसे पढ़ी लिखी, सबसे ईमानदार, और सबसे लड़ाकू पीढ़ी जेलों में भरी जा रही है, आपको केवल अपने लिए अगर ज़िन्दगी नहीं जीनी तो इनके लिए लिखें, बोलें, इन्हे जानें, और इन सारे एक्टिविस्टों को जेल से रिहा किए जाने का सरकार पर दबाव डालें, क्योंकि सरकार और संस्थानों के साथ किए जा रहे आपके क्रूरतापूर्ण समझौतों का अंत कहीं नहीं है. देर सबेर सरकार के साथ लोकतांत्रिक लड़ाई के लिए सबको आगे आना ही होगा.

(क्या पता कल मैं भी ये सब ना लिख पाऊं)

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