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आनंद तेलतुम्‍बडे की गिरफ्तारी को मजबूत जातिवादी व्यवस्था वाले देश में एक मामूली सूचना समझिए!

वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी प्रो. आनंद तेलतुम्‍बडे को शनिवार तड़के साढ़े तीन बजे मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया जब वे कोच्चि से मुंबई लौट रहे थे। मीडियाविजिल पर छपी खबर के अनुसार पुणे पुलिस से इंस्‍पेक्‍टर इंदुलकर ने उनकी गिरफ्तारी की है, जिसकी पुष्टि एडवोकेट प्रदीप मांध्‍याने ने की। इंदुलकर ने उन्‍हें बताया कि पुणे की निचली अदालत द्वारा उनकी जमानत खारिज किए जाने के कारण उन्‍हें गिरफ्तार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर की गई प्रो. आनंद की गिरफ्तारी के बाद वरिष्ठ पत्रकार धीरेश सैनी ने समाज में उनके योगदान और आज हुई गिरफ्तारी को उनकी किताब का जिक्र कर समझाया है

यह किताब आनंद तेलतुंबड़े की है। क्या आप खैरलांजी के बारे में जानते हैं। खैरलांजी नाम का एक छोटा सा गांव है महाराष्ट्र में। लेकिन, यह उस भयावह अपराध की वजह से चर्चा में आया जो हमारे देश, हमारे बहुसंख्यको के धर्म और हमारे समाज की निर्ममता का भी उदाहरण है। इस गांव में 29 सितंबर 2006 को एक अनुसूचित जाति के परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। एक महिला, उसकी एक बेटी और दो बेटों को गांव में नंगा घुमाया गया। पीड़ितों को भयंकर यौन यातनाओं से गुजरना पड़ा और एक लोकतांत्रिक देश में मनुवादी ढंग से हत्यारों का शिकार होना पड़ा। (हालांकि, सीबीआई ने गैंगरेप के आरोप को खारिज कर दिया था।)
यह सब शांति से गुजर गया। मीडिया ख़ामोश रहा। पुलिस खामोश रही। आरोपियों में भाजपा के एक विधायक का नाम भी शामिल था जिसने बाद में आरोप को झूठा करार दिया। महाराष्ट्र में सरकार कांग्रेस-एनसीपी की थी। अगर सोशल एक्टिविस्ट न होते, इस बारे में रिपोर्ट न छपती तो सब कुछ खामोशी से गुजर जाता। जी, समझते हैं कि क्यों सत्ताएं मीडिया के धुरंधरों को गोदी में बैठाकर सोशल एक्टिविस्ट्स के प्रति नफ़रत फैलाती हैं। सोशल एक्टिविस्ट्स की रिपोर्ट और अनुसूचित जाति के लोगों के आंदोलन के बिना सरकारी मशीनरी हरकत में नहीं आई।

आनंद तेलतुंबड़े की किताब यह भी बताती है कि दलितों का नौकरियों और संसद या विधानसभा में प्रतिनिधित्व भर भी इस वर्णवादी समाज के अन्यायों को पूरी तरह रोक नहीं देता। यह बर्बर ढांचा उन प्रतिनिधियों को भी खरीद कर या डरा कर इस्तेमाल कर सकता है। खैरलांजी की वारदात के दौरान एसएचओ, एसपी, डीएम, सरकारी डॉक्टर कमज़ोर तबकों से ही थे। और आयरनी यह कि इस वारदात को अंजाम देने वाले लोग जिस राजनीतिक ताक़त वाली जाति से ताल्लुक रखते हैं, वह ओबीसी में ही आती है। उत्तर भारत की भी ऐसी जातियों के बर्ताव और सवर्ण बनने की चाहत में मनुवादी ढांचे का टूल बनने की उनकी विडंबना को आप देख सकते हैं।

बहरहाल, सूचना यह कि इस खैरलांजी किताब के लेखक आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी पर एक निश्चित अवधि तक सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद। यह भी इस मजबूत जातिवादी व्यवस्था वाले देश में एक मामूली सूचना समझिए।
बात यह कि बहुत सारी भयानक बातें और विश्लेषण आनंद तेलतुंबड़े जैसे बुद्धिजीवियों की वजह से ही लोगों तक पहुंचते हैं। हमारे जैसे लोग जो अंग्रेजी नहीं जानते, उन तक भी सोशल मीडिया पर आ जाने वाले अनुवादों के टुकड़ों के जरिये।

लेखक : धीरेश सैनी

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