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लोकसभा चुनाव के बाद हुईं यूपी में राजनीतिक रंजिश से जुड़ी हत्याओं पर सब चुप क्यों हैं?

उर्मिलेश

यूपी में हिंसा, हत्या, बेहाली, बर्बरता और शासकीय-दमन (पत्रकार सहित) बड़ी खबर नहीं! खबर में सिर्फ बंगाल रहना चाहिए. बीच-बीच में कश्मीर भी. चाहो तो समुद्री तूफ़ान दिखाओ, क्रिकेट का उफान या चंद्रयान की भावी उड़ान.

आगरा में यूपी बार कौंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव की उनके निर्वाचन के महज दो दिन बाद कोर्ट परिसर में ही हत्या हो जाती है. पर बड़े न्यूज चैनलों के लिए खबर ज्यादा बड़ी नहीं लगती.

12 जून की शाम, देश के कई बड़े हिन्दी न्यूज़ चैनल ‘हिन्दू-मुसलमान डिबेट’ या बंगाल में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस दिखाने में जुटे हैं! कुछ तटीय क्षेत्र पहुंच कर आने वाले समुद्री तूफ़ान से निपटने की तैयारी भी दिखा रहे हैं. ‘अंग्रेजी वाले कई लिबरल्स’ नीरव मोदी या क्रिकेट पर टिके हुए हैं. पर बगल के आगरा जाने की किसी को फुर्सत नहीं, जहां प्रदेश बार कौंसिल की एक महिला-अध्यक्ष की नृशंस हत्या कर दी गई.

‘रामराज’ को ‘जंगलराज’ कहने की जुर्रत कौन करे?
क्या किसी ने गिनती की, लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में अब तक कितनी राजनीतिक रंजिश से जुड़ी हत्याएं हुईं? चुनाव-बाद हिंसा के नाम पर बंगाल सुर्खियों में है क्योंकि ‘निजाम’ की यह जरुरत है. पर यूपी की चुनाव-बाद हत्याओं पर रहस्यमय आपराधिक-खामोशी! ‘निजाम’ खामोशी चाहता है तो कौन बोले? उस अमेठी वाली हत्या पर भी अब कोई खबर नहीं, जिसे एक समय जोर-शोर से दिखाया गया था. चुनाव-बाद गाजीपुर सहित यूपी की ज्यादातर हत्याएं कभी खबर ही नहीं बनीं.

हत्या की खबर दिखानी है तो सिर्फ बंगाल और कश्मीर की दिखाओ, और कहीं दिखाने का क्या मतलब? लोग देखना भी नहीं चाहेंगे, इतना बड़ा बहुमत जो मिला है. ‘बहुमत वालों’ के इलाके की ‘निगेटिव’ खबर क्यों दिखाएं?

अभी सोमवार को झांसी के पास केरल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे चार गरीब यात्रियों की मौत हो गई। वे साधारण बोगी में ठुंसे पड़े थे। हवा-पानी की कमी और बेहाली ने उन्हें सफर पूरा नहीं करने दिया. उनकी जिंदगी का ही सफर पूरा हो गया.

क्या यह खबर आपने देश के ‘राष्ट्रीय’ या ‘क्षेत्रीय’ कहे जाने वाले न्यूज चैनलों पर प्रमुखता से देखी? इस पर कोई गंभीर डिबेट सुनी? फिर वो प्रदेश बार कौंसिल की महिला अध्यक्ष की नृशंस हत्या को भला बड़ी खबर क्यों मानेंगे?

और हां, ‘रामराज’ को ‘जंगलराज’ कहने की जुर्रत नहीं करना. घोर पाप लगेगा, नौकरी और विज्ञापन, दोनों का संकट. और मोहल्ले में ‘देशद्रोही’ कहलाने का खतरा अलग से! मीडिया का ‘न्यू इंडिया शास्त्र’!

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