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भाड़े की भीड़ पर सवार तथाकथित ‘शेरों’, रैली के बाद भीड़ की दिहाड़ी चुकाया करो!

आज मेरे शहर में कांग्रेसियों के भगवान राहुल गांधी आ रहे हैं, और मुझे सुबह-सुबह अपने निर्माणाधीन भवन की ओर कूच करना पड़ रहा है। मुझे कल ही एक शुभेच्छु चेता चुके हैं, “तुम्हारे मज़दूरों को ड्योढ़ा- दुगुना मोल देकर कांग्रेसी ले जा सकते हैं।”

सुना है कुछ दिन बाद यहां मोदी जी आने वाले हैं। तब भी मुझे यही चौकसी बरतनी होगी।

नेताओं की रैलियों-सभाओं में आने वाली “भारी भीड़” इन्हीं दिहाड़ी के मजदूरों से अटी पड़ी होती है। लोकल आदमी महंगा पड़ता है। उसे जौनसार अथवा चम्बा से लाना ले जाना, खिलाना, पिलाना भारी खर्चे का काम है। इसके मुकाबले पूरब अथवा अन्य प्रदेशों से आये कुशल- अकुशल श्रमिक अधिक मुफ़ीद होते हैं। उनकी पिकनिक भी हो जाती है। काम भी मेहनत का नहीं। और कुछ घण्टे में फ्री। बस कुछ देर मोदी मोदी अथवा राहुल गांधी ज़िंदाबाद चिल्लाना है।

अभी मोदी जी की सभा मेंं उनका एक “कट्टर समर्थक” राहुल गांधी ज़िंदाबाद चिल्ला दिया। जब मार पड़ी, तब उसने बताया कि पिछली बार यही सिखाया गया था।

मेरी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माननीय श्री प्रीतम सिंह जी से लम्बे समय से कोई मुलाक़ात नहीं है। लेकिन मेरा लिखा उनके कई साथी पढ़ते हैं।कृपया मेरी सलाह उन तक पहुंचा दें। मज़दूरों को दिहाड़ी अग्रिम हरगिज़ न दी जाए। अपितु सभा समापन के बाद उन्हें लाने वाला ठेकेदार उन्हें पेमेंट करे। अन्यथा सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

राहुल गांधी के भाषण के बीच मे ही जनता उठ कर चल देगी, जैसा कि मोदी जी के साथ कई बार हो चुका है। साथ ही सभी भाड़े के मज़दूर श्रोताओं से कपड़े के झंडे वापस ले लिए जाएं। वे बाद में उनका झोला अथवा पोछा बना कर जग हंसाई कराते हैं।

आज भारत मे कोई भी ऐसा तुर्रम खां नेता नहीं है, जिसे जनता सुनना देखना चाहे। सब की लोकप्रियता भाड़े की भीड़ पर आश्रित है। कभी हम लोग अपने बचपन मे इंदिरा गांधी अथवा हेमवती नन्दन बहुगुणा को सुनने मीलों दूर पैदल चल, टिहरी आते थे। आज राहुल, मोदी अथवा शाह के आने पर मैं मन ही मन उन्हें बददुआ देता हूँ। सड़कों पर कर्फ्यू लग जाता है, और हमारा सारा रूटीन बिगड़ जाता है।

रॉबर्ट वाड्रा कभी आये, तो उसे अवश्य देखना चाहूंगा। एक तरफ मैं हूँ कि हर साल अपनी कुछ न कुछ पैतृक ज़मीन बेच डाल रहा हूँ। दूसरी तरफ वह है, जिसकी जहां नज़र पड़ती है, वह ज़मीन उसकी हो जाती है। पौराणिक देवताओं की तरह दिव्य पुरुष है। जो नज़रों से ही औरत को प्रेग्नेंट कर डालते थे।

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