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राजस्थान कांग्रेस विकल्पहीनता के कारण ज़िंदा हैं, मुसलमान राजनीतिक रूप से यतीम हैं!

जितेंद्र महला

राजस्थान में आरएसएस-बीजेपी के सामने कांग्रेस इसीलिए ज़िंदा है क्योंकि गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस दल और नेता अभी तक विचारधारा की पुख़्तगी की कमी और बेजोड़ संघर्ष की कमी के कारण कांग्रेस का विकल्प नहीं बन सके.

वरना कांग्रेस विचारधारा के मामले में एकदम मर चुकी है, कांग्रेस अपने मजबूत 9 फिसदी आबादी वाले मुसलमान वोट बैंक की मुसलमान बिरादरी से आजादी के सत्तर साल में आज तक सिर्फ़ दो सांसद दे सकी.

1984 और 1991 में झुंझुनूं लोकसभा सीट से अयूब ख़ाँ

स्वर्गीय अयूब खां

कांग्रेस अपनी विचारधारा के बूते मुसलमान समुदाय से आने वाले एक भी उम्मीदवार को लोकसभा नहीं भेज सकती. राजस्थान में कांग्रेस विचारधारा के मामले में मर चुकी है, वह विकल्पहीनता के कारण ज़िंदा है. वह अपने एक लोकसभा उम्मीदवार को पार्टी के वोट ट्रांसफर नहीं करवा सकती. वह पहलु ख़ान, अफराजुल और रक़बर के मामले में कोई विचारधारात्मक स्टैंड नहीं ले पाती. राजस्थान के मुसलमान राजनीतिक रूप से यतीम हो चुके हैं.

यह हालात तब है जबकि सच्चर कमेटी और भारत की जनगणना के हिसाब से पूरे देश में मुसलमान आबादी की सघनता को देखने के लिए पांच श्रेणियां बनाई गई हैं, जिसमें से पहली श्रेणी के वे जिले हैं जिनमें कुल आबादी का पच्चीस फिसदी या उससे भी ज्यादा मुसलमान हैं, दूसरी श्रेणी उन जिलों की है जहां कुल आबादी का 10 से 25 फिसदी मुसलमान हैं.

इस दूसरी श्रेणी में राजस्थान के झुंझुनूं, चूरू, सीकर, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर, जयपुर, जोधपुर, दौसा, भरतपुर और सवाईमाधोपुर आते हैं.

राजस्थान के मुसलमानों को जागना चाहिए, उन्हें अपने हक़ों के लिए लड़ना चाहिए. 1952 से शुरू लोकसभा चुनावों के बाद अबतक पंद्रह लोकसभा चुनाव हुए हैं और कुल 317 सांसद चुने गए हैं, उनमें से मुसलमान सांसद महज़ दो बार झुंझुनूं लोकसभा सीट से अयूब खान 1984 और 1989 में चुने गए, इस तरह 317 में से 2 का मतलब हुआ की 0.7 फिसदी हिस्सेदारी, जबकि आज के 2011 की जनगणना के अनुसार मुसलमान आबादी 9 फिसदी है, इस हिसाब से 28 सांसद या उसके आगे-पीछे यह आंकड़ा होना चाहिए.

राजस्थान के मुसलमानों को हर राजनीतिक दल से 25 में 2 सीटें अपनी आबादी के अनुपात में मांगनी चाहिए. यहीं न्याय है, दो सांसद इस बार लोकसभा हर हाल में पहुंचने चाहिए. 1989 के बाद एक भी मुसलमान सांसद राजस्थान से नहीं चुना गया है.

विधानसभा में 18 मुसलमान विधायक होने चाहिए, अभी 8 ही हैं. लड़िये खुद के लिए, खुद के लिए खुद को ही लड़ना पड़ता है. आप इस देश के नागरिक हैं, आपकी आबादी के अनुपात में जितना हिस्सा बनता है, उसके लिए आपको लड़ना चाहिए.

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