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राजस्थान: दलित मज़दूर को पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, अब पर्दा डालने में जुटी पुलिस

भंवर मेघवंशी

गरीब मजदूर को ज़िंदा जला दिया गया!

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के तिलस्वा में एक कांग्रेस नेता की खदान पर बागवानी का काम करने वाले दलित मजदूर गंगाराम बलाई को पेड़ से बांधकर ज़िंदा जला कर मार डाला गया है।

मृतक शाहपुरा क्षेत्र के ईटमारिया गांव का निवासी था। घटना बिजोलिया थाना क्षेत्र के बहादुर जी का खेड़ा के पास जंगल की है।

कानून का डर खत्म होता जा रहा है, नेताजी ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस ने भी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तक छलांग लगा दी।

गंगाराम का शव एक सूखे अधजले पेड़ के नीचे मिला है। मृतक के शरीर पर बाइक के टायरों के तार लिपटे मिले हैं। पुलिस की संवेदनहीनता देखिए, वह इसे आत्महत्या मान रही है और परिवारजनों को आत्महत्या मानने के लिए मज़बूर कर रही है, लेकिन परिजन इस हत्या ही बतला रहे हैं। एफएसएल टीम ने सबूत इक्कठा कर और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया है।

गंगाराम के परिजन पुलिस की थ्योरी पर बिल्कुल यकीन नहीं कर रहे हैं। उनके भाई नारायण का कहना है उसके भाई को अज्ञात लोग बंधक बनाकर जंगल में ले गए जहां पेड़ से बांधकर उस पर डीजल छिड़क जिंदा जलाया।

जातियों के नाम पर खेल कूद और उछल कूद करने वाले, रक्तदान, प्रतिभा सम्मान करने वाले ठेकेदार भी अपने अपने दड़बों में छुपे रहे।

कोई कुछ न बोला, सब खामोश है, जलाया गया इंसान एक आम मजदूर था, उसकी फिक्र न शासन को है और न ही प्रशासन को।

शर्मनाक बात है।

जंगलराज की स्थितियां हैं। तुंरत कार्यवाही हो, मृतक को मुआवजा मिले, वर्ना लोग आंदोलित होंगे।

निर्मम हत्या को आत्महत्या बता रही पुलिस!

जिंदा जलाये गये मजदूर गंगाराम बलाई की जेब में सुसाईड नोट मिला है, शरीर जल गया, पेड़ जल गया, पर जेब मे कागज का टुकड़ा बचा रह गया!

मृतक अनपढ़ था, उसने सुसाईड नोट कैसे लिखा? मृतक अविवाहित था, तो उसने सुसाईड नोट में अपनी बेटी का ज़िक्र क्यों किया?

कैसी अंधेरगर्दी है यह, सरकार बहादुर सुनती क्यों नहीं है?

(स्वतंत्र पत्रकार एवं दलित विचारक)

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