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राजस्थान: दलित और उसकी भाभी का पुलिस ने किया सामूहिक बलात्कार, नाखून उखाड़े और आंख फोड़ी

धर्मेंद्र जाटव

क्या वाकई इस देश मे दलित होना गुनाह है ?? 4 जुलाई को सरदारशहर (चुरू) में एक महिला और उसके देवर नेमीचंद को पुलिस पकड़ कर थाने लाई, कानूनन अगले ही दिन उन्हें कोर्ट में पेश करना था, लेकिन पुलिस ने इस महिला को मौजमस्ती के लिए पकड़ा था तो कोर्ट क्यों जाना, पुलिस चार दिन तक देवर को पीटती रही, और महिला के साथ दारू पी पी कर सामूहिक बलात्कार करती रही। महिला के नाखून तक उखाड़ दिए गए। 7 तारीख को पुरुष दम तोड़ देता है। तब पुलिस को ऊपर से फोन आ गया होगा कि मन भर गया हो तो दोनो को कही फेंक दो। नहीं तो क्या कारण है जिस चोरी के केस को पुलिस ने खुद FR लगा खत्म कर दिया हो। चार चार दिन तक गैर कानूनी तरह से लोगो को बंधक बना कर रखे।

सरकार की करतूत यही खत्म नहीं हुई इसकी पहली जानकारी कल 12 जुलाई को शाम को सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। और 13 जुलाई को सभी न्यूज पेपर में खबर आई। मतलब 5 दिन तक सरकार इस केस को रफा दफा करने और पीड़ितों को धमकाने में लगी रही। जैसा कि पीड़िता के पति ने बताया भी की उससे जबरदस्ती खाली कागज़ों पर साइन लिए गए हैं।

भास्कर की खबर के अनुसार जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती पीड़िता ने पुलिस काे पत्र देकर आरोप लगाया कि चोरी के आरोप में सरदारशहर थाना पुलिस उसके देवर को उठाकर ले गई और उसके साथ ही मुझे भी उठा ले गई। थाने में शराब पीकर पांच-छह पुलिसकर्मी मेरे साथ मारपीट करते थे। उन्हाेंने तीन दिन तक बांधकर व लटकाकर पीटा। पैराें के नाखून खींचकर उखाड़ डाले। आंख फाेड़ दी। थानाधिकारी सहित अन्य पुलिसकर्मियाें ने मेरे साथ दुष्कर्म भी किया। पीड़िता ने एसएमएस अस्पताल परिसर में बने थाने में यह पत्र साैंपते हुए आराेपियाें के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। 

पीड़ित महिला के इन बयानाें का एक वीडियाे भी वायरल हाे रहा है। सरदारशहर थाने में 7 जुलाई को नेमीचंद ने दम ताेड़ा था। इससे तीन दिन पहले चोरी के छह महीने पुराने मामले में ग्रामीणों ने युवक को पकड़कर पीटा था और पुलिस के हवाले किया था। सरदार शहर पुलिस की टीम तीन जुलाई काे युवक को साथ लेकर उसके गांव में छानबीन करने गई थी। घर से चाेरी का सामान नहीं मिला ताे उसकी भाभी काे भी साथ में लेकर गई थी। तीन दिन तक दाेनाें देवर-भाभी काे पुलिस ने हिरासत में रखा था।

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