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सीबीआई पहले कांग्रेस का तोता, तो अब नरेन्द्र मादी का तोता!

 
पहले कलकत्ता की घटना से जुड़े कुछ सवाल !
• कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर बिना वारंट के जांच, पूछताछ या तलाशी के लिए जाने का अधिकार क्या सीबीआई के पास थे?
• कोलकाता के पुलिस कमिश्नर के घर पर जाने वाली सीबीआई टीम के अफसरों की गिरफ्तारी क्या पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है ?
• सीबीआई दफ्तर पर बंगाल पुलिस का जमावड़ा किस लिए था ?
• क्या कोलकाता के पुलिस कमिश्नर व आम जनता के लिए कानून अलग अलग है?
• यदि सीबीआई वारंट लेकर आती तो क्या जांच सही होती ?
• यदि सीबीआई ने राजीव कुमार को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था तो वे हाजिर क्यों नहीं हुए ?
• वेस्ट बंगाल सरकार ने सीबीआई को जांच के लिए दिया कंसेंट वापिस ले लिया यानी सरकार की अनुमति से ही सीबीआई जांच को आगे बढ़ाएगी। तब क्या वेस्ट बंगाल सरकार राजीव कुमार से पूछताछ या तलाशी की अनुमति देगी?
• क्या वेस्ट बंगाल सरकार व पुलिस का हर कदम इस लिए सही मान लिया जाएगा कि दूसरी तरफ लोकपाल की नियुक्ति न करने वाली, भ्रष्टचारियों को बचाने वाली मोदी सरकार है?
• क्या भ्रष्टाचार करने या जांच के दस्तावेज न देने वालों को बचाने की असंवैधानिक कोशिश से मोदी की फासिस्ट सरकार को हराया जा सकेगा?
• क्या मोदी को हराने के एक ही नतीजा हो कि पुलिस का दुरुपयोग करने वाली ममता या उन जैसे नेताओं को सत्ता में लाया जाए ?
• क्या हम राजनीति व घट रही घटनाओं का विश्लेषण मोदी बनाम अन्य कोई भी की दृष्टि से देखते हुए करें व मोदी को गरियाने भर की भाषा में ही हर घटना को समझें ?
• क्या राफेल जांच का आदेश न देने वाले, आलोक वर्मा के हक में फैसला न देकर आलोचनाओं के घेरे में आये चीफ जस्टिस गोगोई आज न्यायप्रिय घोषित कर दिए जाएंगे क्योंकि उन्होंने स बीआई की दरखास्त पर कहा कि इसमें कोई दम दिखता नहीं है?
• क्या सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के बिना वारंट राजीव कुमार के घर जाने व सीबीआई टीम की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का भी संज्ञान लेकर निर्णय देगी?
इन सवालों के बाद कुछ यादें व फिर पूरे अमले का विवरण भी !
1991 में सीबीआई सज्जन कुमार (1984 में दिल्ली में हुए सिख कत्ले आम के एक दोषी) के घर उसे गिरफ्तार करने गई तो लोगों ने सीबीआई की उस टीम को बंदी बना लिया। पुलिस ने छुड़ाने के लिए कुछ करने की बजाय हाथ खड़े कर दिए थे। कोर्ट से सज्जन कुमार को अग्रिम जमानत का आदेश आने पर सीबीआई अधिकार मुक्त हो पाए थे!
• डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ जांच कर रही एजेंसी सीबीआई जांच के दौरान डेरे में आकर तलाशी लेने के काम को अंजाम नहीं दे पाई थी!
• बाबा राम पाल को हाई कोर्ट ने कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया तो नहीं पेश हुआ राम पाल, फिर पुलिस गिरफ्तार कर लाने गई तो विरोध किया था !
• अजय चौटाला के सिरसा निवास पर सालों पहले पुलिस या सीबीआई तो कुछ विरोध हुआ फिर अजय राजस्थान के लिए निकल गए थे (याद पूरी नहीं कि फिर गिरफ्तार हुए या नहीं)।
• कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को जांच में शामिल करने गए सीबीआई टीम को पुलिस ने गिरफ्तार किया !

यह घटना ताजा है इसलिए तथ्य विस्तार से

शारदा चिट फंड घोटाला हुआ। जिन मुकुल राय की गिरफ्तारी हुई वह अब भाजपा में है।

पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी (विशेष जांच दल) ने मामले की जांच की। उस एसआईटी के प्रमुख राजीव कुमार थे, जो अब कोलकाता के पुलिस कमिश्नर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एसआईटी ने मुकद्दमा दर्ज करने सहित कुछ कदम सही से उठाए हैं मगर अपनी जांच से जनता में विश्वास पैदा नहीं कर पाई कि पीड़ितों को न्याय मिलेगा। जिसकी जरूरत थी। इसी आधार पर सीबीआई जांच कर रही है। 
सीबीआई को एसआईटी ने जांच के दस्तावेज सौंप दिए, जैसा कि जरूरी था। जांच के दौरान सीबीआई की टीम इस नतीजे पर पहुंची कि एसआईटी प्रमुख राजीव कुमार (जो एसआईटी प्रमुख थे व अब कोलकाता के पुलिस कमिश्नर हैं) ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज सीबीआई को नहीं दिए जो जांच के दौरान एसआईटी ने कब्जे में लिए थे। 
सीबीआई के अनुसार राजीव कुमार को इसी सम्बन्ध में जांच को आगे बढ़ाने के लिए पूछताछ के लिए बुलाया गया । मगर राजीव कुमार पूछताछ के लिए सीबीआई टीम के सामने हाजिर नहीं हुए। इन हालात में सीबीआई की टीम राजीव कुमार के घर पूछताछ करने के लिए गई। (संभावना यह है कि सीबीआई घर की तलाशी लेती व राजीव कुमार को गिरफ्तार भी करती)।
राजीव कुमार के घर पहुंची टीम को वेस्ट बंगाल पुलिस ने वारंट दिखाने के लिए कहा। वारंट नहीं दिखाये गए तो पुलिस ने सीबीआई टीम के सदस्यों को हिरासत में ले लिया । उन्हें पुलिस थाने ले जाया गया। कलकत्ता के सीबीआई दफ्तर को पुलिस ने घेरे में ले लिया। राजीव कुमार के घर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया । ममता बनर्जी (वेस्ट बंगाल मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गईं । उनके साथ धरना स्थल पर राजीव कुमार सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स) को बाद में सीबीआई दफ्तर पर तैनात किया गया (किसने आदेश दिया मालूम नहीं, सक्षम अधिकारी ने ही आदेश किया होगा)।

ममता ने कहा कि संघीय ढांचे पर चोट है। कलकत्ता में हुई विपक्षी रैली से डर कर मोदी सरकार ने सीबीआई को डराने के लिए भेजा है। विपक्ष के नेताओं ने ममता का समर्थन किया। सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई व कहा कि राजीव कुमार गवाही को खत्म कर सकता है, इसलिए तुरन्त केस की सुनवाई हो। चीफ जस्टिस गोगोई ने कल मंगलवार को सुनवाई के दिन तय करते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा दायर दरखवास्त हमने देख ली है, उसमें कुछ ऐसा नहीं जिसके आधार पर कह सकें कि गवाही समाप्त किये जाने की नीयत है राजीव कुमार की। यह भी कहा कि यदि यह तय हुआ कि गवाही को खत्म करने की कोशिश हुई है तो हम ऐसा सख्त कदम उठाएंगे कि याद रहे।

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