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रुचि सोया-रामदेव डील: बाबा रामदेव का लाला रामदेव बनना और बैंकों को 14 हजार करोड़ से ज्यादा की चपत

गिरीश मालविय

IBC कानून कैसे इन बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचा रहा है, इस सौदे से आप बेहतर तरीके से समझ सकते हैं! हम बात कर रहे हैं बाबा रामदेव की पतंजलि ओर रूचि सोया के बीच के सौदे की.

रुचि सोया पर कुल कर्ज लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का है. एनसीएलटी ने दिसंबर 2017 में कर्जदाता स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड और डीबीएस बैंक के आवेदन पर रुचि सोया को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता प्रक्रिया के लिए भेजा था.

इस सौदे में दो बड़े खिलाड़ी सामने आए. पिछले साल अगस्त में रुचि सोया के लिए सबसे ऊंची बोली अडानी विल्मर ने लगाई थी। तब पतंजलि के साथ उसका कड़ा मुकाबला हुआ.

अडानी ने 5,474 करोड़ रुपये में रुचि सोया को खरीदने का ऑफर दिया था, जिसमें से 4,300 करोड़ रुपये बैंकों को दिए जाने थे। पतंजलि ने 5,765 करोड़ रुपये का ऑफर दिया, जिसमें से 4,065 करोड़ रुपये ऋणदाताओं को चुकाने थे। समग्र रूप से पतंजलि का ऑफर ज्‍यादा होने के बावजूद, अडानी का ऑफर इसलिए बड़ा माना गया क्‍योंकि मूल्‍यांकन मैट्रिक्‍स के अनुसार, कंपनी चलाने के लिए पैसा लगाने के मुकाबले कर्ज का भुगतान अधिक महत्‍व रखता है।

लेकिन बाद में अडानी ने खरीद प्रक्रिया में देरी होने का हवाला देते हुए अपना ऑफर वापस लेने का फैसला किया इस पर पतंजलि ने कहा कि अगर अनुमति दी गई तो वह अडानी जितनी रकम भी चुका सकती है, उसने अप्रैल में बोली 200 करोड़ रुपये बढ़ाकर 4,350 करोड़ रुपये कर दी.

उस वक्त बाबा रामदेव की पतंजलि ने एनसीएलटी को बताया कि 4,350 करोड़ रुपए की पेशकश में वह 3,233 करोड़ रुपए बैंकों से उधार लेगी और 1,185 करोड़ रुपए आंतरिक एवं अन्य स्रोतों से जुटाएगी.

यानी अब खेल समझिए. रूचि सोया पर लगभग 12 हज़ार करोड़ कर्ज है उसे आधी से भी कम कीमत में पतंजलि खरीद रहा है. रूचि सोया को दिए गए कर्ज में 1,800 करोड़ रुपये का सबसे अधिक एक्सपोजर एसबीआई का है। इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का एक्सपोजर 816 करोड़ और पीएनबी का 743 करोड़ रुपये है. उसे चुकाने के लिए भी पतंजलि और सरकारी बैंको से और कर्ज ले रहा है. और NLCT में केस किसने डाला है? स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड और डीबीएस बैंक ने, यानी सबसे पहले उन्हीं का कर्ज चुकाया जाएगा जो प्राइवेट क्षेत्र के बैंक हैं.

चलिए यहाँ तक भी ठीक था, लेकिन कल एक और खबर आई है. जो पतंजलि पिछले साल तक NLCT के सामने कह रहा था कि 1,185 करोड़ रुपए अपने अलग स्त्रोत से लेकर आएंगे, अब वह कह रहा है कि हम सिर्फ 600 करोड़ रुपये का ही इंतजाम कर सकते हैं. अब पतंजलि 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उन्हीं सरकारी बैंकों से लेना चाहती है जो पहले से ही रूचि सोया में अपने पैसे डुबो चुके हैं. यानी उन्हीं बैंको से कर्ज लेकर उनका ही कर्ज वापस चुकाया जाएगा. अपनी जेब से सिर्फ 600 करोड़ ही लगाए जाएँगे.

सबसे पहले विदेशी बैंको का कर्ज चुका कर उन्हें बरी किया जाएगा. बाकी सरकारी बैंक तो बने ही लुटने के लिए हैं. आप और हम इसमें पैसे जमा करें और इनके बड़े उच्चाधिकारी भ्रष्ट सरकार से मिल कर उद्योगपतियों को अरबों खरबों दिलवाए और सरकार कहे कि देखा, देश में हमने कितना बड़ा आर्थिक सुधार किया.

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