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धर्म, विपक्ष या संवेदनशील नागरिकों को गाली देने वाले लोग रेप पीड़ितों को कैसे इंसाफ दिलवाएंगे?

महेंद्र सिंह

निर्भया रेप के बाद लोगों ने किसी फिल्म, धर्म, पत्रकार, यूनिवर्सिटी या विपक्ष के ख़िलाफ़ प्रदर्शन नहीं किया था। लोगों ने उस वक़्त की कांग्रेस सरकार को गालियां दी थी। राष्ट्रपति के दरवाज़े पर लात मारी थी। देश के 1 नम्बर नागरिक को ललकारा था कि बाहर निकल अपने महल से और देख हम कितने गुस्से में हैं।

उस वक़्त लोगों के दिलों में असली दर्द था। उनको इतनी समझ थी कि रोज़ लुट रही इज़्ज़त के लिए ज़िम्मेदार कौन है और इसका असली समाधान कहां से होगा।

लेकिन पिछले 4-5 साल से हर रेप की घटना के बाद सत्ता के चाटुकारों का एक ऐसा ग्रुप TV और सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाता है, जिसका काम सिर्फ़ सरकार को बचाना होता है। पत्रकार और कलाकार ये काम बख़ूबी करते हैं। ये लोग सरकार को नहीं बल्कि हमेशा बलात्कार के ख़िलाफ़ मोमबत्ती मार्च निकालने वालों, किसी यूनिवर्सिटी वालों, मुसलमानों और कुछ पत्रकारों को टारगेट करेंगे और ये स्थापित कर देंगे कि रेप के लिए कोई सरकार नहीं, ये लोग ज़िम्मेदार हैं।

बताइये! रेप की घटना के ख़िलाफ़ सड़क पर उतने वालों को गैंग घोषित कर दिया जाता है, मोमबत्ती गैंग। कमाल है!

कमाल की बात तो ये है कि अपने आप को पढ़े-लिखे, दिमाग़वाले विवेकशील मानने वाले लोग भी उनके बिछाए जाल में फंस जाते हैं।

ऐसे लोग किसी महिला डॉक्टर या किसी निर्भया को इंसाफ़ दिलवाने के लिए नहीं, सिर्फ़ अपने उस तथाकथित भगवान को बचाने की मशक्कत में लगे हैं, ये जिनके भक्त हैं।

बलात्कारियों और ज़िम्मेदार सरकारों को बचाने वाली ऐसी मानसिकता के ख़िलाफ़ भी हमें न्याय की ज़रूरत है।

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