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रवीश की रिपोर्ट: जब महिलाओं ने कहा, ‘आखिरी बार पानी में जहर मिलाकर दे दो’

प्रवीण

रवीश का लाल माइक बिहार के वैशाली जिले के महिसौर गांव में जा पहुंचा. इस देश की हकीकत ऐसे ही गांव बयां करते हैं, जहां आजादी के 72 साल बीत जाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है. गांव के लोगों ने कहां-कहां चक्कर नहीं काटे, एसडीएम से लेकर नेता तक सभी के दफ्तर गए, खत लिखे, पर हुआ कुछ नहीं. एक साल पहले ही गांव के लोगों ने पानी की समस्या को भांप लिया था, लेकिन कुछ असर नहीं हुआ. डिजिटल इंडिया के नाम पर उन्होंने अपनी शिकायत ऑनलाइन भी भेजी, पर वहां से भी कोई जवाब नहीं आया.

10 दिन से पानी ना होने की वजह से दवाई तक ना लेने वाली महिला ने रवीश से कह दिया कि हमको कोई आखिर बार पानी में जहर देकर ही मार दो. लगता है मरने के बाद ही हमारी ये समस्या दूर हो पाएगी, जिंदा रहते हुए तो ये मुमकिन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा.

इतना सब करने के बाद आखिर में इंसान और करेगा भी क्या? वो कहां जाए किस में विश्वास दिखाए, हर कोई तो उसके साथ धोखा करने पर ही उतारू है. चुनाव का मौसम है, नेता लोग एक बार फिर झूठे वादों का पुलिंदा लेकर उनके बीच पहुंच गए हैं. हकीकत को ये है नेताओं को भी नहीं मालूम के निजात का रास्ता है कहां. वो बस किसी तरह से अपनी दुकान बचाने में लगे हैं.

आप जब दिल्ली में बैठकर ज्यादा से ज्यादा वोट डालने की वकालत कर रहे हैं, तो एक बार ये भी बता दीजिए इस देश की 80 फीसदी आबादी को इस वोट से क्या मिलेगा. इस महान लोकतंत्र के पिटारे में इस देश की 80 आबादी के लिए आखिर ऐसा क्या है, जो बार-बार वोट डालने के बावजूद भी 70 से ज्यादा साल से इन तक पहुंच नहीं पाया. आखिर और कितने साल इन्हें ऐसे ही इंतजार करना होगा. क्या आखिर में इस दुनिया में नहीं रहने के बाद ही इनकी जिंदगी में बाहर आएगी. अगर ऐसा है तो फिर इनके लिए किसी बात भी क्या मतलब नहीं रहा जाता. बाकी सेल्फी तंत्र में सेल्फी सेल्फी खेलते रहिए, जो है सो तो है ही.

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