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पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रेमन मैग्सेसे अवार्ड-2019’

साल 2019 के लिए एशिया का नोबेल माने जाने वाले रेमन मैग्सेसे पुरस्कारों की घोषमा कर दी गई है। इस साल इस प्रतिष्ठित अवार्ड के लिए 5 लोग चुने गए हैं, जिसमें भारत के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार भी शामिल हैं। रवीश कुमार मशहूर टीवी शो प्राइम टाइम के एंकर हैं और पिछले 25 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं।

वह एक ऐसे भारतीय टीवी एंकर, लेखक और पत्रकार हैं, जो भारतीय राजनीति और समाज से संबंधित विषयों को मुखरता के साथ जनता के सामने रखते हैं। रवीश एनडीटीवी समाचार नेटवर्क के हिंदी समाचार चैनल ‘एनडीटीवी इंडिया’ में वरिष्ठ कार्यकारी संपादक है, और चैनल के प्रमुख कार्यक्रमों जैसे ‘हम लोग’ और ‘रवीश की रिपोर्ट’ के होस्ट कर चुके हैं। रवीश कुमार का प्राइम टाइम शो वर्तमान में काफी लोकप्रिय है। 2016 में “द इंडियन एक्सप्रेस” ने अपनी ‘100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों’ की सूची में उन्हें भी शामिल किया था।

इस साल के मैग्ससे अवार्ड के अन्य चार विजेता म्यांमार से को स्वे विन, थाईलैंड से अंगखाना नीलापजित, फिलीपींस से रेमुंडो पुजांते केययाब और दक्षिण कोरिया से किम जोंग-की हैं।

रवीश कुमार को इससे पहले भी रामनाथ गोयनका पुरस्कार, कुलदीप नैय्यर पुरस्कार और गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। रवीश ने चार किताबें लिखी हैं, इश्क में शहर होना, देखते रहिये, रवीशपन्ती, द फ्री वॉइस: ऑन डेमोक्रेसी, कल्चर एंड द नेशन

रवीश कुमार का जन्म बिहार के पूर्व चंपारन जिले के मोतीहारी में हुआ। उन्होंने लोयोला हाई स्कूल, पटना, से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, और फिर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह दिल्ली आ गये। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता पढ़ने के लिए आईआईएमसी में भी दाखिला लिया था। उसके बाद उन्होंने जेएनयू से भी पढ़ाई की है।

एशिया का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले रेमन मैग्सेसे अवार्ड को एशिया के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के विजेताओं का चयन जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, पंथ या लिंग से ऊपर उठकर किया जाता है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है जो एशिया में मानव विकास के मुद्दों को साहस और रचनात्मकता के साथ हल करते हों और साथ ही उनके योगदान से समाज में बदलाव आया हो।

साल 2018 में यह पुरस्कार दो भारतीय नागरिक डॉ भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक को दिया गया था।

 मुंबई के डॉ. भरत वाटवाणी को सड़क पर भीख मांगने वाले हजारों मानसिक तौर पर बीमार गरीबों के इलाज और उन्हें उनके परिवार वालों से मिलाने और लद्दाख के इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पिछले वर्ष के रेमन मैग्सेसे अवार्ड दिया गया था। बता दें कि मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का मुख्य किरदार फुंसुख वांगड़ु, वांगचुक से ही प्रेरित था।

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