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रोहतक से भाजपा के उम्मीदवार अरविंद शर्मा तिकड़मबाजी में दूसरे भजनलाल हैं!

डॉ सतीश त्यागी

डॉ अरविन्द शर्मा ने रोहतक से भाजपा का टिकट हासिल कर यह तो साबित कर दिया कि वे तिकड़म के मामले में भजनलाल से कम नहीं हैं.

चलिए उनके राजनीतिक जीवन के विषय में जान लें. यह संयोग है कि जिस साल (1996) में मैं पत्रकारिता में आया, उसी साल अरविन्द शर्मा ने अपना पहला चुनाव सोनीपत से लड़ा और वह भी निर्दलीय! सोनीपत सरीखी जाट बहुल सीट से एक ब्राह्मण का जीत हासिल करना कोई साधारण बात नहीं थी, एक तरह से यह इतिहास सृजन था. 1998 में अरविन्द पुनः सोनीपत से लड़े लेकिन इस दफा शिव सेना के प्रत्याशी के रूप में. शिव सेना से लड़ना भी एक तरह से निर्दलीय लड़ने जैसा था लेकिन इस बार वे तीसरे स्थान पर पहुँच गए. हाँ, वोट उन्हें 1 लाख 44 हज़ार मिले.

1999 में ऐन चुनाव के मौके पर शर्मा ने रोहतक से निर्दलीय ही ताल ठोक दी. कहा जाता है कि शर्मा को भजनलाल ने रोहतक भेजा था ताकि हुड्डा की पराजय सुनिश्चित हो सके लेकिन 27 हज़ार वोटों पर सिमट कर रह गए. 2004 में डॉ शर्मा ने करनाल और कांग्रेस का रुख किया और विजयी रहे.

2008 आते-आते चंचल-चपल अरविन्द फिर से मचल उठे और डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के विश्वासमत हासिल करने के 3 दिन पहले बसपा सुप्रीमो मायावती से मिले और एलान कर बैठे कि वे लोकसभा में सरकार के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे. चिंतित केंद्र सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा की ड्यूटी लगाईं कि किसी भी तरह शर्मा को मनाएं. करामाती हुड्डा ने पंडित जी को मना भी लिया. इस डील में शर्मा जी ने सोनिया गाँधी से यह आश्वासन ले लिया कि 2009 में करनाल से वही प्रत्याशी होंगें. और ऐसा ही हुआ, वे 2009 में पुनः करनाल से विजयी हुए. 2014 के लोकसभा चुनाव में शर्मा जी तीसरी बार कांग्रेस प्रत्याशी थे लेकिन इस दफ़ा पंजाब केसरी चोपड़ा ने उन्हें शिकस्त दे दी.

अक्टूबर 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले डॉ साहब बसपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार घोषित हो ‘हाथी’ पर सवार हो जुलाना और यमुनानगर के रणक्षेत्र में कूद पड़े लेकिन दोनों ही जगह थर्ड पोजीशन पर रहे. जुलाना में उन्हें 27 हज़ार व् यमुनानगर में मात्र 10 हज़ार वोट ही मिले. डॉ अरविन्द शर्मा के 23 वर्ष के राजनीतिक जीवन का नौंवा चुनाव है. पिछले 8 चुनावों में वे तीन बार जीते और 5 दफा हारे हैं . इस बार क्या होगा , देखते हैं ……..

पुस्तक: पॉलिटिक्स ऑफ़ चौधर

लेखक: डॉ सतीश त्यागी

मूल्य: हार्डबाउंड 1200 व पेपरबैक 600 रुपये

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