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यात्रा वृतांत: मैं जिसे पागल शराबी समझ रही थी, वह गहरे दुःख में डूबा हुआ पिता और प्रेमी था

  • Savita G Jakhar

ये महज़ फोटो नहीं है…. एक सबक़ है, जो एक अजनबी से मुझे मिला, जो मुझे बार-बार याद दिलाता है की किसी को कऱीब से जाने बिना जज़ करना बेवकूफ़ी ही नहीं सामने वाले के साथ नाइंसाफ़ी भी है।

वो गर्मियों की शाम थी। सन -सैट, सन राइज़ और बहता पानी मेरी कमज़ोरियों में शामिल हैं.. जहाँ भी दिखे खींची चली जाती हूँ।

मैंने गाड़ी को साइड में लगाई और उतर के सन-सैट प्वाइंट से ढलते सूरज को देख रही थी, थोड़ी दूरी पर एक शराबी आदमी बैठा हुआ था जिसके टैटू गुदे हाथों में अभी भी बियर का कैन था।

सोचा, अच्छा व्यू है होटल जाने से पहले कुछ फोटोज ले लेती हूँ… आस – पास कोई दिख नहीं रहा था, सिवाय उस शराबी आदमी के जिसको फोटो लेने के लिए बोला जा सके.. सोचा, सेल्फी ट्राई करती हूँ, इतने में किसी ने आवाज़ दी ‘अगर आप चाहें तो मैं आपका फोटो ले सकता हूँ?’ मन ही मन सोचा, ‘ठीक से चला भी नहीं जा रहा है ये क्या फोटो लेगा? नीचे गहरी खायी थी, मुझे लगा फ़ोन इसके हाथ से गिरा तो गया समझो … नए आई फोन को उसके हाथों में देने का मन नहीं था, लेकिन वो इतनी दूर से मेरे लिए उठकर आया था तो मना करने का भी मन नहीं हुआ.

ना चाहते हुए भी आई-फ़ोन पकड़ा दिया उसे.

‘फोटो चैक कर लीजिये सही आया या नहीं, नहीं तो मैं दूसरा लेता हूँ’… , उसने कहा।

फ़ोन मेरे हाथों में आते ही मैंने राहत की साँस ली और फोटो बिना देखे ही बोल दिया ‘बहुत अच्छा है, शुक्रिया।

मुझे कोई रिस्क नहीं लेना था उसे दोबारा आई फ़ोन देके। मन ही मन सोच रही थी की कांपते हाथों से क्या फोटो लिया होगा इसने इसलिए देखने की ज़हमत भी नहीं उठायी। आगे जाने के लिए मैं वहाँ लगा मैप देखने लगी और वो वहीँ पास में खड़ा था.

‘आप पहली बार आयी हैं यहां? उसने पूछा।

हाँ कहते हुए मैंने भी पूछ लिया, ‘आप आते रहते हैं यहाँ?

‘मैं यहीं रहता हूँ पहाड़ों के नीचे वो जो गांव दिख रहा है वहाँ मेरा घर है.. मैं यहाँ ऑलमोस्ट हर रोज़ आता हूँ ऑफिस के बाद, ढलते हुए सूरज को देखने।.. मेरे बेटे और मेरी गर्लफ्रेंड, जो मेरे बच्चे की मां भी थी… ये जगह उनकी पसंदीदा जगहों में से एक थी, छुट्टी वाले दिन हम लोग यहां पिकनिक मनाने आते थे। ..मेरी गर्लफ्रैंड पेंटर थी, वो अक्सर अपने कैनवास और पेंट का सामान साथ लाती थी और हम यहां घंटों बीताते थे…!

अँधेरा होने को था, मेरा वहां से जाने का मन था, शराब की गंध मेरे लिए असहनीय थी लेकिन उसको यूँ इग्नोर करके जाने को मन नहीं मान रहा था…!

वो बोलता जा रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान घड़ी की टिक टिक पे था। उसकी बातों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पा रही थी, लेकिन उसकी बातों में उसकी दोस्त और बेटे के लिए ” हैं ” की जगह ”था ” बोलना मुझे अंदर से परेशान कर रहा था, मैंने ना चाहते भी उससे पूछ ही लिया, ‘अब वो आपके साथ नहीं रहते?

‘उनका अब मेरे साथ रहना मुमकिन नहीं है… वो अब वहाँ हैं जहाँ से कोई वापस नहीं आता ..चार महीने पहले इसी रास्ते पे हमारी कार का एक्सीडेंट हो गया था.. ग़हरी पीड़ा के साथ उसने बोला। ‘हम यहीं आने के लिए निकले थे लेकिन यहां तक पहुंचे नहीं।.. तबसे रोज़ यहां आता हूँ और ऊपर वाले से एक ही सवाल पूछता हूँ।.. मुझे भी क्यों नहीं बुलाया? … कैसे और किसके लिए ज़िंदा रहूं? … लेकिन जवाब नहीं मिलता.

मुझे गहरी पीड़ा के साथ शर्मिंदगी हुयी।.. जिस इंसान को कुछ देर पहले मैं पागल शराबी मान रही थी वो गहरे दुःख में डूबा पिता और प्रेमी निकला। … उससे नज़रे मिलाना मुश्किल हो रहा था।

‘मैं अब विदा चाहता हूँ उसने बोला. ‘ रुकिए.. ‘ आपको मैं ड्राप कर सकती हूँ अगर आप चाहें? … अँधेरा भी हो गया है और इतनी दूर आप थक जायेंगे, मैंने पीछे से कहा।

‘शुक्रिया, लेकिन इसीलिए तो पैदल आता हूँ इतनी दूर ताकि थक जाऊँ और नींद आ जाये, नहीं तो सारी रात आँखों में जाती है’.. इतना कहकर वो चला गया।

होटल में आकर जब फोटो देखा तो और भी ज्यादा शर्मिंदगी हुयी, लेकिन माफ़ी मांगने के लिए वो मेरे सामने नहीं था। .. जो फोटो उसने लिया था वो उस ट्रिप का सबसे शानदार फोटो था।

जब भी इस फोटो को देखती हूँ मन ही मन उस अजनबी का अहसान मानती हूँ, सिर्फ फोटो के लिए नहीं बल्कि मुझे और बेहतर इंसान बनाने के लिए भी.

हर रोज दुआ करती हूँ उसके लिए की भगवान उसको ये दुःख सहने की शक्ति दे।

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