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इस नंगी पीठ को देख लीजिए, ये नंगी पीठ ही असल में भारत का नक्शा है!

इस नंगी पीठ को देख लीजिए। ये नंगी पीठ ही असल में भारत का नक्शा है। जामिया का ये लड़का नंगा बदन लिए हुए विश्वविद्यालय के गेट पर बैठा हुआ है। लड़के का कहना है कि “पुलिस और सरकार उन्हें ऐसे न मारे, लाइब्रेरियों में घुसकर न मारे, फ्रिज चेक करके न मारे, दाड़ी खींचकर न मारे, लिबास देखकर न मारे, मारना ही है तो ऐसे नंगे बदन पर मारे”
साथी दोस्त बदन पर हाथ फेर-फेरकर तपन कर रहे हैं, कहीं दोस्त को शीत न लग जाए।

दिल्ली की ठंड से ज्यादा ठंडी हमारी चेतना पड़ चुकी है।
हिंद की कौम समय के उस नाजुक दौर में है जहां से लौटना उतना ही मुश्किल है जितना 1940 के बाद के भारत में विभाजन को रोकना लग रहा था। एक पूरी की पूरी कौम अपने ही मुल्क में द्वितीय नागरिक की तरह महसूस कर रही है, या महसूस कराया भी जा रहा है। ये लड़ाई मुसलमानों की नहीं है। बल्कि हिंदुओं की है, उनकी चेतना की है। उनके नैतिक पतन की है। हिन्दू शब्द में जिस गरिमा का आभास होता था उसके लेने पर साध्वी प्रज्ञा, गिर्राज सिंह, शंभु रैगर जैसे हत्यारों की छवि नजर आने लगी हैं। जिस जमीन को देखकर यूनानियों और अरबियों ने “हिन्द” कहा था वह उतनी भद्दी कभी नहीं दिखती थी। अब हिन्दू कौम में जन्म लेने वाले नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करें कि ऐसी नंगी पीठ लिए कोई भी लड़का किसी विश्विद्यालय के गेट पर बैठ न पाए। अन्यथा ये हमारे नैतिक बल की सबसे बड़ी हार है। इस पीठ पर विभाजन के निशान खिंचने से पहले इसे बचा लीजिए। जैसे आजतक बचाते आए हैं, जैसे आजतक साथ में रहते आए हैं।

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