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रिपोर्ट

सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के दो साल, संघ का दलित व लोकतंत्र विरोधी चेहरा

हिमांशु कुमार

दो साल पहले महाराष्ट्र पुलिस ने एक वकील, दो प्रोफेसर, एक पत्रकार और एक बेघरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया.

पुलिस ने इन लोगों पर आरोप लगाया कि इन लोगों ने भीमा कोरेगांव की सभा का आयोजन करने में मदद करी थी।

आप लोगों को याद होगा कि भीमा कोरेगांव में दलित संगठनों के बुलावे पर लाखों दलित इकट्ठा हुए थे

दो सौ साल पहले उस जगह पर दलित मानी जाने वाली महार जाति के सिपाहियों ने ब्राह्मणों के नेतृत्व में लड़ने वाली पेशवा की सेना को हराया था।

साल 2018 की एक जनवरी को सभा के बाद दलितों की रैली पर ब्राह्मण संगठनों के आतंकवादियों ने हमला कर दिया था।

उसके बाद पुलिस ने हमला करने वाले आतंकवादियों को नहीं पकड़ा, क्योंकि उस संगठन का नेता मोदी का गुरु है।

उलटे दलितों को ही पकड़ कर जेलों में डाल दिया गया। बाद में पहले मोदी के गुरु उस आतंकवादी को पहचानने वाली गवाह अट्ठारह साल की लडकी की लाश कुँए में पायी गयी थी।

सभा में एक लाख से ज्यादा दलितों को देख कर ब्राह्मण घमंड की राजनीति करने वाली ताकतें घबरा गई।

इसलिए सरकारी ताकत का दुरूपयोग करते हुए महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दलितों की समानता की आवाज़ का समर्थन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया।

हम जानते हैं कि ये लोग अदालत से निर्दोष साबित होंगे क्योंकि सभा करना कोई जुर्म नहीं है।

लेकिन भाजपा बेशर्म पार्टी है। भाजपा और संघ उद्देश्य तो दलितों को दबा कर रखना और सवर्णों के राज को बनाये रखना है।

असल में भारत में पूंजीवादी शक्तियाँ और सवर्ण शक्तियाँ एक ही हैं और यह सवर्ण पूंजीवादी शक्तियां सरकार पर हावी हैं।

इसलिए गरीबों मजदूरों या दलितों के संगठन उनकी जागरूकता या आत्मसम्मान की बात करने वालों को भाजपा जेल में डाल देती है।

इसीलिये भीम आर्मी के चंद्रशेखर आज़ाद को लम्बे समय तक सहारनपुर जेल में बंद कर के रखा गया, जिग्नेश मेवानी को बोलने से रोका जाता है।

दलित संगठनों के भारत बंद के बाद हजारों दलितों को जेलों में डाल दिया गया था।

ये संघी भाजपाई लोग दलितों को बेवकूफ बनाने के लिए बाबा साहब का फोटो लगा कर चिकने चुपड़ी बातें करते हैं।

लेकिन दलितों के स्वाभिमान और अधिकारों की मांग पर ये लोग पूरी ताकत से हमला कर देते हैं।

मुझे मालूम तो था कि राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ ब्राह्मणवादी सवर्ण संगठन है, लेकिन ये लोग इतनी बेशर्मी से नंगे होकर सवर्णों के पक्ष में काम करेंगे इसका मुझे अंदाज़ा नहीं था।

दलित संगठनों को बधाई कि उन्होंने संघ के चेहरे से नकाब उतार दिया और संघ का भी धन्यवाद कि वो जल्द ही नंगा हो गया और जनता को अपनी असलियत बता दी।

भारत के सवर्णों अब तो जाग जाओ। ये संघ तुम्हें इतना बर्बाद और बदनाम कर देगा और जातिवाद के गू में इतना लथेड़ देगा कि तुम्हारे बच्चे भी ये बताने में शर्म महसूस करेंगे कि उनके पूर्वज सवर्ण थे और संघ के समर्थक थे।

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