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औसत, स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देने वाला विज्ञापन राजनीतिक विवादों को जन्म दे रहा है

स्टीरियोटाइप में बड़े और अदृश्य खतरे निहित होते हैं. सर्फ एक्सेल विज्ञापन विवाद के संदर्भ में यह लिखना बहुत जरूरी है. एक बच्चा जिसकी उम्र धर्म का ककहरा समझने के लिए बहुत कम है, उसे पजामा-कुर्ता और टोपी पहनाकर दिखाना ही इस विज्ञापन की सबसे बड़ी असफलता है.

सामान्य समझ कहती है कि इस उम्र के बच्चे के सामने अगर नमाज और रंग-पानी में हुल्लड़ करते बच्चों का विकल्प हो तो वह निसंदेह रंग और हुल्लड़ का हिस्सा बन जाएगा. लेकिन विज्ञापन एक अबोध बच्चे को धार्मिक आग्रही बच्चे को रूप में पेश करता है, जिसे रंग और पानी से बच कर नमाज अदा करनी है.

यह एक औसत सोच वाला विज्ञापन, जो धार्मिक रूढ़ियों को तोड़ने की बजाय उन्हें मजबूत करने की वकालत करता है, जिसे संगीत और सोच की भावुकता की चाशनी में लपेट कर पेश किया गया, उसे लेकर वितंडा खड़ा कर दिया गया.

यह हमारे समय का सच जिसमें पाले चुनना सबसे पहली जरूरत बन गया है. दिमागी गांठ दोनों पालों में मौजूद है. वरना विशुद्ध मुनाफे के लिए काम करने वाली एक कंपनी के पक्ष में ऐसे लोग- जिन्हें अशोक वाजपेयी के शब्दों में चतुर सुजान कहा जाता है- मुफ्त का प्रचार करने निकल गए.

कपड़ा फींचने का उत्पाद बनाने वाली कंपनी को देखते ही देखते लाखों मुफ्त के विज्ञापनकर्ता मिल गए. डिटरजेंट पाउडर के साथ सेल्फी खींची जाने लगी.

जिस प्रचार के लिए कंपनी फिल्मी सितारों, तारिकाओं को करोड़ो रुपए भुगतान करती है, वह काम मुफ्त में होने लगा यह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का उत्पाद है. दीगर वक्त में सेल्फी खिंचाने वाले अधिकतर लोगों की वैचारिक प्रतिबद्धता इस कंपनी को पूंजीवाद की धुरी बताकर गरियाने में गुजरती रही है. पर समय का कोप ऐसा है कि विवेक पर वितंडा का पर्दा पड़ गया है.

2010 की बात है. देवबंद के एक मौलाना अमेरिका की यात्रा पर जा रहे थे. दिल्ली हवाई अड्डे पर अपनी सजग नागरिकता के बोझ से उत्साहित एक भद्र मध्यवर्गीय महिला ने विमान के उड़ान भरने से ठीक पहले हल्ला मचाया कि मौलाना विमान को उड़ाने की बात कह रहे हैं.

असल में मौलाना फोन पर अपने किसी रिश्तेदार को बता रहे थे कि वे सही सलामत विमान पर सवार हो चुके हैं और विमान बस उड़ने वाला है. जागरुक महिला के दिमाग में वही स्टीरियोटाइप खेल रच रहा था. एक पजामा कुर्ता पहनने वाला, दाढ़ी रखने वाला, मौलाना जहाज को विस्फोट से उड़ाने की ही बात कर सकता है.

नतीजे में मौलाना को जहाज से उतार लिया गया, उन्हें हिरासत में ले लिया गया. उनकी फ्लाइट मिस हो गई. बाद में गृहमंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद चीजें स्पष्ट हुईं.

समय का अंधेरा इतना गाढ़ा है कि औसत, स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देने वाला, मुनाफाखोर कंपनी का विज्ञापन भी राजनीतिक विवादों को जन्म दे रहा है. वो भी एक ऐसी बीमार सोच की प्रतिक्रिया में जिसका सारा अस्तित्व ही स्टीरियोटाइप की ऑक्सिजन पर निर्भर है.

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