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रिपोर्ट

मध्यप्रदेश: दलित बच्चों की पीट-पीटकर हत्या, आरोपी ने कहा, भगवान ने सपने में दिया मारने का आदेश

मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव में दो व्यक्तियों ने दो दलित बच्चों को कथित तौर पर पंचायत भवन के सामने शौच करने पर लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना के सिलसिले में मामला दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मजदूरी करने वाले मनोज बाल्मीकि की बहन रोशनी (12) और बेटे अविनाश (10) की दो आरोपियों हाकिम यादव और उसके भाई रामेश्वर यादव ने बुधवार सुबह लाठी से पीट-पीटकर हत्या कर दी।

पुलिस ने बताया कि भावखेड़ी गांव में मनोज वाल्मीकि परिवार के साथ रहता है। मनोज की 12 साल की बहन रोशनी और उसका बेटा अविनाश शौच के लिए गए थे, तभी दोनों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद गांव में तनाव है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। आरोपियों ने बच्चों का वीडियो भी बनाया था। 

बादल सरोज/सुरेश दहिया

हत्यारों ने भगवान के आदेश से की हत्या
“खुले में शौच” की बकवास और गुमराह करने वाली खबर के हैडिंग पर मत जाइए। शिवपुरी के बच्चों के हत्यारे स्वच्छता दूत नहीं थे। खबर लिखने बताने के पीछे भी एक एजेंडा होता है।
● असली खबर बोल्ड अक्षरों की दो पंक्तियों के नीचे दबी तीसरी पंक्ति में है। (जिसे अलग से हाईलाइट लोकजतन ने किया है।) हत्या करने वाले के “सपने में भगवान आने और उसे राक्षसों का संहार करने का आदेश देने” की ‘स्वीकारोक्ति’।
● 33 करोड़ में से ये कौन से वाले भगवान थे? संहार किये जाने वाले राक्षस कौन हैं? खबर यहां से शुरू होती है और ठेठ आपके घर के भीतर पहुंचती है।
● जब तक समाज में, सोच में, विचार में, आचार में, व्यवहार में, घर मे परिवार और खुद के भीतर भी छुपे इस दुष्ट मनु की शिनाख्त नहीं करेंगे: पक्का मानिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं आप और आपका परिवार।
● जिस मनु ने इस देश की मेधा, शोध, खोज, निर्माण और सृजन के कोई 1500 साल बर्बाद कर दिए, इस देश से उसकी मनुष्यता और संवेदनशीलता छीन ली ; वह मनु अब #हिंदुत्व का बाना ओढ़कर आखेट पर निकला है।
● रौशनी (12 वर्ष) अविनाश (10 वर्ष) के लिए आँसू जाया मत कीजिये। हो सके तो अपनी रौशनी और अपने अविनाश को भेड़िया या उसका शिकार या दोनों, बनने से बचाईये। वरना ह्यूस्टन से शाहजहांपुर तक घण्टा तो बज ही रहा है, पढ़ लीजिये इसी शंखध्वनि में अपना भी गरूड़ पुराण !!

अभी तक सामाजिक भूचाल क्यों नही आया?

अभी तक सामाजिक भूचाल क्यों नही आया? ये मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं है बल्कि, सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक और सांस्कृतिक है. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जनपद मे अविनाश वाल्मीकि और शिवानी वाल्मीकि को जिन गुंडों ने लाठी व डंडो से पीट पीट कर मार दिया है उसके प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा से तार जुड़े हैं.

खुद को इंद्रदेव समझने वाले वायु मार्ग से कभी कभार पर्यटक की भाँति मध्यप्रदेश के चुनिंदा स्थानों का भ्रमण कर नौटंकी करने वाले नेताजी के क्षेत्र की ये घटना है औऱ नेताजी कुछ बोल ही नहीं पा रहे हैं। नेताजी और राजघराने ने क्या यही किया 400 साल सत्ता में रहकर कुछ तो बोलो महराज औऱ महराज को भगवान मामने वाली मंत्री इमरती देवी, कमलेश जाटव, रणवीर जाटव। चमचयाई करके कुर्सी पर बैठने से अच्छा है कि खुद की झोपड़ी में टूटी चारपाई पर ही बैठे रहो।

आजादी के 71 वर्ष बाद भी भारत के ग्रामीण विकास की झकझोरने वाली घटना जिस पर कोई राजनैतिक दल कुछ नहीं बोलेगा। मायावती सिर्फ दलित सवर्ण करने से काम नहीं चलेगा औऱ ना ही कढ़ी को चावल में मिलाकर खिचड़ी बनाने वाली कार्यवाही का भरोसा दिलवाने से काम चलेगा औऱ न ही घटना को जातीय राजनीति का रंग देकर पल्ला झाड़ने से काम चलेगा। वास्तविकता से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। जरूरत है मानसिकता में बदलाव की, गरीब अमीर के बीच की खाई कम करने की। जातियां खत्म हो रही हैं निकट भविष्य में दो ही जातियां बचेंगी पहली अमीर दूसरी गरीब। ये उन लोगों की भी जवाबदेही हैं जो कल एकात्म मानववाद की खुशियां मना रहे थे। क्या सिर्फ कागजों में ही विकास चलता रहेगा या सफेदपोशो द्वारा वातानुकूलित कक्षों में बैठकर लंबे चौड़े भाषण फेंकर अंत्योदय हो जाएगा। अपने संगीतमय जहरीले वचनों से मानवता तथा एकात्म मानववाद के खिलाफ जहर फैलाने वाले कथा वाचकों की भी जिम्मेदारी बनती है। इंसान इंसान में राक्षस नामक काल्पनिक चरित्र के नाम पर भेदभाव फैलाकर आखिर कब तक इंसानियत को कलंकित किया जाता रहेगा। यहां सम्प्रदायवाद या मानवता भेदी राग अलापकर मानवता के दुश्मनों को सामूहिक नरसंहार की अप्रत्यक्ष अमुमति देना कहां तक न्यायोचित हैं। हम 71 वर्षो में देश के जनमानस को चंद शब्दों का मतलब नहीं समझा पाए हैं जो समझ गए हैं वो इन शब्दों को व्यवहार में नही ला पाए हैं :-
“हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य बनाने लिए तथा उसके नागरिकों को :सामाजिक,आर्थिक औऱ राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए दृढ़-संकल्प …………अधिनियमित औऱ आत्मार्पित करते हैं”

सच मे कभी कभी लगता है भारत जैसे मूर्खो के देश में जन्म होना धरती पर बोझ बढ़ाने जैसा ही है, और ये धरती के असली बोझ 70% की आबादी के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत हैं जिन्हें बहुत ही अलंकारिक शब्द ‘किसान’ से संबोधित किया जाता हैं।

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