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समाज

येदुरप्पा पर किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद करने वाले भारतीय जन के लुटेरे मन को नहीं जानते!

बोधिसत्व

दुविधा छोड़ो
चोर के साथ जाओ या उसकी कलाई तोड़ो!

किसी येदुरप्पा की डायरी पर आप उस समाज से किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद करते हैं तो आप भारतीय जन के मन को नहीं जानते।

ये वह समाज है जो अपने घूसखोर रिश्तेदारों से और करीब होने का मौका खोजता है। ये वह समाज है जो अपने लोगों द्वारा कि गई लूट का गौरव गाता है।
ये वो समाज है जो काम न करने को अफसरी मानता है।
ये वो समाज है जो रेलवे से चादर तौलिया चुरा लेने को वीरता मानता है
ये वो जो अधिक दहेज को प्रचारित करता है और बहू को आज भी पैसा न पाने पर जला देता है

ये वो समाज है जो ताकतवर के थूक से तिलक लगाया करता है। हर घूसखोर से कमाने के तरीके से प्रभावित रहता है। जो प्रतिपल सरलता को त्यागने और कुटिलता को अपनाने का अभियान चलाए रखता है।

आप इस समाज को फिर से देखिए। उसके लिए ये आर्थिक घोटाले पैसा कमाने के तरीके भर हैं। यह कमाने के तरीके में नैतिकता को शून्य प्रतिशत भी नहीं मानता।

एक ही सोच है इसकी पैसे कमाओ यह नहीं सोचो कि कैसे कमाओ। जो कमा नहीं सकता वह संत हो या संन्यासी इस समाज में उसकी कोई औकात नहीं!

अगर बेईमानी आधार होती किसी के रिजेक्ट होने की तो जितने नेता रातों रात अरबपति हुए वे आज सत्ता और समाज के माथे का मुकुट ना होकर कहीं और अपने बैठने का ठिकाना खोजते पाए जाते।

निराला जी की पंक्ति को थोड़ा बदल कर कहूं तो यह कह सकता हूं बेईमान जिधर हैं उधर शक्ति!

मैं बचपन से सुनता आ रहा हूं कि जितनी फैलाने की तनख़ाह है उतनी तो जयनाथ रोज घूस अंकोर में बना लेते हैं। यह घूस अंकोर भारतीय समाज की संस्कृति का अटूट अंग है। मैं ऐसे अनेक लोगों को जानता हूं जिन्होंने घूस और लूट के धन से अट्टालिकाएं उठा रखी हैं। और ये एक दूसरे की कमाई से जलते हैं लेकिन इनमें अद्भुत राष्ट्रीय एकता है जिसके कारण सभी एक दूसरे की लूट को सार्वजनिक करने से हमेशा बचते हैं। इस तरह सभी भगत हैं।

एक दो ऐसे पुलिस वालों को जानता हूं जिन्होंने घायल व्यक्ति को मरने दिया जिससे दुर्घटना ग्रस्त की कार के सामान दबा सकें।

कृपया अनायास भावना में न बहें। ये लूट से हिस्सा पाने के लिए किसी भी तरह की हिंसा को हथियार बनाने वाला और कैसे भी समाज में स्थान पाने में गहराई तक यकीन रखने वाला समाज है। जब आप येदुरप्पा को गलत बता रहे होंगे वे 40 और चोरों को आपके सामने रख कर आपको यह समझा रहे होंगे कि यह कोई नई बात नहीं।

अब आप जो चाहे सो करें यह समाज लूट को अपना संस्कार बना चुका है।

आप की ताकत हो तो कलाई पकड़ने कल येदुरप्पा और बाकी चोरों के घर जाइए नहीं तो चोरों के साथ अपनपा बढ़ाइए। सुखी रहेंगे। ये दोनों काम आपके मैं को आराम देंगें। बस दुविधा से बाहर आ कर यथार्थ का सामना कीजिए। दुविधा छोड़ो चोर के साथ जाओ या उसकी कलाई तोड़ो!

जय हो

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