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रिपोर्ट

क्या NDTV एक बार फिर सरकार के निशाने पर है?

सत्ताधारी सरकार की आँखों की किरकरी बने सभी स्वतंत्र मीडिया हाउस अब निशाने पर हैं। मौजूदा सरकार उसकी आलोचना करने वाले मीडिया ग्रुप्स का लगातार गला घोंटने में लगी हुई है। सरकारी दबावों को लगातार झेल रहा न्यूज़ चैनल NDTV एक बार फिर से सरकार के निशाने पर नज़र आ रहा है। पिछले कई दिनों से वीडियोकॉन D2h पर अचानक NDTV न्यूज़ का चैनल बिना किसी सूचना के बंद कर दिया गया है। लोगों की टीवी स्क्रीन पर लिखा आ रहा है कि हम आपको यह चैनल नही दिखा सकते क्योंकि अब यह आपके सब्सक्रिप्शन का हिस्सा नहीं है।

चैनल बंद होने के कारण लोग लगातार ट्विटर और फेसबुक पर लिख रहे हैं। वीडियोकॉन D2h की सर्विस इस्तेमाल करने वाले गिरीश मालवीय ने जब कल सुबह वीडियोकॉन D2h पर NDTV न्यूज़ चैनल नं. 305 लगाया तो उन्हें वह बंद मिला। उन्हें एक नज़र में लगा कि कोई टेंपरेरी फाल्ट हुआ होगा शाम तक ठीक हो जाएगा।

शाम को जब उनके कुछ मित्रों ने फेसबुक पर लिखा कि उन्हें भी वीडियोकॉन D2h पर NDTV नहीं दिख रहा है, तब उन्हें समझ आया कि यह तो सभी सब्सक्राइबर के साथ किया गया है। इसके बाद उन्होंने इस मामले को और तफसील से जानने के लिए वीडियोकॉन कस्टमर केयर पर फोन लगाया। फोन उठाने वाले अधिकारी से जब उन्होंने चैनल बंद किए जाने का कारण पूछा तो अधिकारी ने उन्हें सख्त़ मिजाज़ में जवाब देकर बताया,  “हमने NDTV की सर्विस बन्द कर दी है क्योंकि उन्होंने हमारे ब्रॉडकास्टर से समझौता नहीं किया।”

जब गिरीश ने सख्त़ी से उनसे दोबारा पूछा, “क्या वीडियोकॉन ने ऐसा करने से पहले हमें कोई सूचना दी थी कि हम इस चैनल की सर्विस बन्द कर रहे हैं या क्या हमें इसका कारण बताया गया था?” अधिकारी ने इस पर जवाब दिया, “सर ऐसी तो हमने कोई सूचना नहीं दी और अब आप कह रहे हैं तो हम आपकी सर्विसेज तुरंत चालू कर देते हैं।”

मामला संदेहजनक लगने पर गिरीश ने अधिकारी को उसके सीनियर अधिकारी से बात करवाने के लिए कहा। तकरीबन आधा घण्टा इंतजार कराने के बाद अधिकारी ने उनकी बात यश कुमार नामक सुपरवाइजर से करवाई। यश कुमार ने भी वही बात दोहराई जो पिछले अधिकारी ने कही थी। उनका कहना था कि उन्होंने सभी सब्सक्राइबर के साथ यही किया है। इसके अलावा उनके पास गिरीश के सवालों का कोई जवाब नहीं था। उन्होंने चुपचाप NDTV चैनल चालू कर दिया।

इस मामले को लेकर न्यूज़सेंट्रल ने NDTV से भी बात की। NDTV की अधिकारी पायल सिंह का कहना था, “वीडियोकॉन और डिशटीवी ने ऐसा सिस्टम कर दिया है कि वे लोग हमारा चैनल ग्राहकों के विशेष आग्रह पर ही दिखा रहे हैं। हम जल्दी से इस समस्या का हल निकालने कोशिश कर रहे हैं।”

इसके अलावा उन्होंने हमारे किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। यह बड़ी दिलचस्प बात है कि मोदी सरकार के आने के बाद से ही NDTV दिक्कतों का सामना कर रहा है।

इससे पहले भी साल 2016 में 10 नवंबर को सरकार ने भारत भर में किसी भी मंच के ज़रिये NDTV इंडिया के एक दिन के प्रसारण या पुन: प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। उस समय देशभर में मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा था। उस समय एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में बैन के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा था,

“चैनल को एक दिन के लिए बंद करने का निर्णय मीडिया की स्वतंत्रता और इस तरह से भारतीय नागरिकों की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है, जिसके ज़रिये सरकार कड़ी सेंसरशिप थोप रही है और यह इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाता है।”

सरकार की नाकामियों की ख़बरें दिखाने की वजह से NDTV सरकार की आँखों को चुभ रहा है। अब बात यहाँ तक पहुँच गई है कि सत्ताधारी भाजपा सरकार ने चैनल के डिबेट शो में अपने प्रवक्ताओं को भी न जाने के आदेश दे दिए हैं। ऐसे में वीडियोकॉन का NDTV से समझौता न मानने वाला कारण बड़ा हल्का जान पड़ता है।

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