लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

अटल ने नेहरू की मौत पर लिखा था, ‘आज भारत माता दुखी है, उन्होंने अपने सबसे कीमती सपूत खो दिया।’

समर अनार्य

नेहरू: 16 साल से ज़्यादा अंग्रेजी जेलों में तप के निकला गांधी का वह चेला जिसने आज़ादी के बाद देश की कमान संभाली।

नेहरू: जिसे उसकी पत्नी के टीबी से मर रहे होने की खबर पर भी अंग्रेजों ने जेल से रिहा नहीं किया- और यह सुन के तब विएना में मौजूद सुभाष चंद्र बोस ने स्विट्ज़रलैंड में कमला नेहरू का इलाज करवाया।

नेहरू: नेताजी बोस ने अपनी आज़ाद हिन्द फौज की चार ब्रिगेडों में एक जिसके नाम पर रखा. वह भी अरसे पहले कांग्रेस छोड़ चुके होने के बावजूद।

नेहरू: जिसने अंग्रेजों से लुटे भारत में बांध बनवाये, सड़कें बनवाईं, फैक्ट्रियां बनवाईं। और जल्द ही भारत को विश्व की बड़ी शक्तियों में से एक बनाया- ऐसी शक्ति जो फ़्रांस-वियतनाम युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से युद्ध विराम की निगरानी करती थी.

नेहरू: जिसने पुर्तगालियों से गोवा और उसके भी पहले पाकिस्तान में शामिल हो गए जूनागढ़ को सैन्य कार्रवाई कर वापस जोड़ा। हैदराबाद भी बचाया।

नेहरू: जिसने सरदार पटेल के पूरा कश्मीर पाकिस्तान को दे देने पर सहमति से इंकार किया, और अंत समय तक आज़ादी/पाकिस्तान में शामिल होने के ख्वाब देख रहे महाराजा हरी सिंह के बावजूद कश्मीर बचाया।

नेहरू: जो इन सब कुछ के बावजूद कभी महामानव नहीं बना. जिसने गलतियां कीं और मानीं। जिसने पंचशील के सिद्धांत के बाद चीन का धोखा भी देखा। जिसके भारत के नए मंदिरों- माने बांधों- की वजह से करोड़ों आदिवासी विस्थापित हुए.

जिसकी अति लोकतांत्रिकता ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसों को अपनी कैबिनेट में जगह दी- बावजूद इसके कि मुखर्जी भारत छोड़ो आंदोलन के वक़्त मुस्लिम लीग के साथ बंगाल में साझा सरकार चला रहे थे.

नेहरू: वे जिनके निधन पर अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारत माँ ने अपना सबसे प्यारा लाल खो दिया है, सूरज ढल चुका है, अब तीन मूर्ती मार्ग (तत्कालीन प्रधानमंत्री आवास) तरह का आदमी कभी नहीं आएगा।

“आज भारत माता दुखी हैं, उन्होंने अपने सबसे कीमती सपूत खो दिया। मानवता आज दुखी है, उसने अपना सेवक खो दिया। शांति बेचैन है, उसने अपना संरक्षक खो दिया। आम आदमी ने अपनी आंखों की रौशनी खो दी है, पर्दा नीचे गिर गया है। मुख्य किरदार ने दुनिया के रंगमंच से अपनी आखिरी विदाई ले ली है”

नीचे वाजपेयी जी का पूरा शोक सन्देश पढ़िए समझ आएगा कि आज के झूठे मसीहा दरअसल कितने झूठे हैं!

अटल बिहारी बाजपेयी

चिराग बुझ गया

आज एक सपना खत्म हो गया है, एक गीत खामोश हो गया है, एक लौ हमेशा के लिए बुझ गई है। यह एक ऐसा सपना था, जिसमे भूखमरी, भय डर नहीं था, यह ऐसा गीत था जिसमे गीता की गूंज थी तो गुलाब की महक थी। यह चिराग की ऐसी लौ थी जो पूरी रात जलती थी, हर अंधेरे का इसने सामना किया, इसने हमे रास्ता दिखाया और एक सुबह निर्वाण की प्राप्ति कर ली।

मृत्यु निश्चित है

मृत्यु निश्चित है, शरीर नश्वर है। वह सुनहरा शरीर जिसे कल हमने चिता के हवाले किया उसे तो खत्म होना ही था, लेकिन क्या मौत को भी इतना धीरे से आना था, जब दोस्त सो रहे थे, गार्ड भी झपकी ले रहे थे, हमसे हमारे जीवन के अमूल्य तोहफे को लूट लिया गया। आज भारत माता दुखी हैं, उन्होंने अपने सबसे कीमती सपूत खो दिया। मानवता आज दुखी है, उसने अपना सेवक खो दिया। शांति बेचैन है, उसने अपना संरक्षक खो दिया। आम आदमी ने अपनी आंखों की रौशनी खो दी है, पर्दा नीचे गिर गया है। मुख्य किरदार ने दुनिया के रंगमंच से अपनी आखिरी विदाई ले ली है।

क्रांति के अग्रदूत थे

रामायण में महर्षि वाल्किमी ने भगवान राम के बारे में कहा था कि वह असंभव को साथ लेकर आए थे। पंडित जी के जीवन में हमने उस महान कवि की झलक को देखा है। वह शांति के साधक थे तो साथ ही क्रांति के अग्रदूत भी थे। वह अहिंसा के भी साधक थे, लेकिन हथियारों की वकालत की और देश की आजादी और प्रतिष्ठा की रक्षा की। वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के समर्थक थे, साथ ही आर्थिक समानता के पक्षधर थे। वह किसी से भी समझौता करने से नहीं डरते थे, लेकिन उन्होंने किसी के भय से समझौता नहीं किया। पाकिस्तान और चीन को लेकर उनकी नीति जबरदस्त मिश्रण का उदाहरण थी। यह एक तरफ सहज थी तो दूसरी तरफ दृढ़ भी थी। यह दुर्भाग्य है कि उनकी सहजता को कमजोरी समझा गया, लेकिन कुछ लोगों को पता था कि वह कितने दृढ़ थे।

कमजोर नहीं थे नेहरू

मुझे याद है मैंने उन्हें एक दिन काफी नाराज होते हुए देखा था, जबकि उनके दोस्त चीन ने सीमा पर तनाव को बढ़ा दिया था । उस वक्त चीन भारत पर पाकिस्तान के साथ कश्मीर के मुद्दे पर समझौता करने के लिए मजबूर कर रहा था। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि उन्हें दो तरफ से लड़ाई लड़नी पड़ेगी तो वह समझौते के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं थे। नेहरू जिस आजादी के समर्थक थे वह आज खतरे में है। हमे उसे बचाना होगा। जिस राष्ट्रीय एकता और सम्मान के वह पक्षधर थे वह आज खतरे में है। हमे इसे किसी भी कीमत पर बचाना होगा। जिस भारतीय लोकतंत्र को उन्होंने स्थापित किया, उसका भी भविष्य खतरे में है। हम अपनी एकजुटता, अनुशासन, आत्मविश्वास से एक बार फिर से लोकतंत्र को सफल बनाना होगा।

सूरज ढल चुका है

नेता चला गया है, लेकिन उसे मानने वाले अभी भी हैं। सूरज ढल चुका है, लेकिन अब हमे सितारों की रौशनी से ही अपना रास्ता तलाशना होगा। यह परीक्षा का समय है, अगर हम सब खुद को उनके विचारों पर आगे लेकर चले तो समृद्ध भारत के सपने सच कर सकते हैं, विश्व में शांति ला सकते हैं, यह सच में पंडित नेहरू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संसद के लिए यह अपूर्णनीय क्षति है, ऐसा निवासी दोबारा तीन मूर्ति मार्ग पर नहीं आएगा। जबरदस्त व्यक्तित्व, विपक्ष को भी साथ लेकर चलने की क्षमता, उनके व्यक्तित्व को फिर से परिभाषित करता है, ऐसी महानता शायह हम भविष्य में कभी नहीं देख पाएं। विचारों के मतभेद के बाद भी उनके विचारों के लिए मेरे अंदर सम्मान है, उनके प्रतिष्ठा के लिए प्रेम है, देश के प्रति उनके प्रेम और अदम्य साहस का मैं सम्मान करता हूं। इन्ही शब्दों के साथ मैं उस महान आत्मा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

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