लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

समालोचना

मीडिया आजाद है!

पुण्य प्रसून वाजपेयी न कोई मीडिया मुगल है, न ही मीडिया की अपनी कोई ताकत बची है। रेंगते लोकतंत्र के साथ मीडिया का रेंगना उसके वजूद को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, जहां लोकतंत्र को घुटने के बल…

क्या दीपक चौरसिया को रोकना पत्रकारिता पर हमला है?

दिलीप खान दीपक चौरसिया को रोका गया. उसके चैनल ने दिखाया पीटा गया. लोगों ने लिखा पत्रकारिता पर हमला हो गया. शाहीन बाग़ में बीते महीने भर से तमाम पत्रकार गए और रिपोर्टिंग करके लौटे. सब अलग-अलग विचारधारा के लोग…

छठ टोकरा ढोते रवीश कुमार

सिर पर अंधश्रद्धा का टोकरा ढोते रवीश कुमार की छवि की ‘टीआरपी’ अपील ज़ोरदार है। गाँव-ग्रामीण अभिभूत हैं। बिहार-ईस्ट यूपी के छठी दोस्त फ़िदा हुए जा रहे हैं। कोई उनके श्रमसाध्य भारोत्तोलन की प्रशंसा कर रहा है तो कोई उनकी…

रवीश कुमार के सम्मान से चिढ़ क्यों!

प्रकाश के रे पिछले महीने जब रवीश कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रतिष्ठित रेमन मैगसेसे सम्मान देने की घोषणा हुई, तो देश में बड़ी संख्या में लोगों को प्रसन्नता हुई. कई मामलों में उनसे…

रवीश कुमार को बधाई दीजिये न दीजिये, मगर शांत होकर थोड़ा सोचिये

रेमन मैग्सेसे अवार्ड और रवीश कुमार को लेकर फेसबुक पर लगातार लिखा जा रहा है. कोई बचाव में खड़ा है तो कोई विरुद्ध. इसी मामले में हम वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडेय व राजीव नयन बाहुगुणा के कमेंट यहां प्रस्तुत…

न्यूज़ चैनल आपको मूर्ख बना रहे हैं उन्हें बचाने हेतु एक नए आंदोलन का नुस्ख़ा

न्यूज़ चैनलों को बचाने हेतु एक नए आंदोलन का नुस्ख़ा आवश्यकता है कि किसी ऐसे बयान की जिसके कारण धर्म से जुड़े हों। बोलने वाले के ललाट पर टीका हो या ठुड्डी पर बकर दाढ़ी हो। कोई वीडियो मिल जाए…

आजतक की अंजना ओम कश्यप की इस बेशर्मी पर कौन बात करेगा?

विनीत कुमार आजतक की अंजना ओम कश्यप की इस बेशर्मी पर कौन बात करेगा? आजतक की स्टार एंकर अपनी इस रिपोर्टिंग में साफ-साफ कह रही है कि वो अस्पताल की आईसीयू में है. इतनी साफ कि आपको और हमें समझने…

पत्र-का₹ को पत्रकारिता के मूल्य और एथिक्स से मुक्त हो नियुक्ति “पत्र” और “का₹” पर चिंतन करना चाहिए!

संजय श्रमण हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आज श्री रामनाथ गोयंका को याद कीजिये, विराट पुरुषार्थ से उन्होंने “खिलाड़ी अक्षय” पुरस्कार प्राप्त किया था! महान पत्रका₹ खिलाड़ी जी को कौन नहीं जानता? आज ही के दिन पंडित शुक्ल ने “उदन्त मार्तंड”…

राजनीति की दशा जैसी भी हो, पत्रकार और बुद्धिजीवी अपना मनोबल क्यों खोएँ?

ओम थानवी लोग पूछते हैं, राजग को प्रचंड जनादेश मिला है। आप अब भी आलोचक क्यों हैं? कोई बताए कि क्या जनादेश आलोचना का हक़ छीन लेता है? मेरा गिला राजनेताओं से उतना नहीं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों की अपनी ही बिरादरी…

बिकाऊ पत्रकारिता के रिंग मास्टर अमित शाह गोदी मीडिया को अब क्यों हंटर मार रहे हैं?

इमरजेंसी के दिनों के बारे में आडवाणी ने कभी अखबारों के विषय में कहा था कि ‘उन्होंने झुकने का कहा तो आपने रेंगना शुरू कर दिया है.’ लेकिन 2019 में आज जिस तरह की अघोषित इमरजेंसी है, उसमें मीडिया के…