लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

समाज

दुर्गा पूजा में राम की जयकार के क्या मायने हैं?

अपूर्वानंद विजयादशमी बीत रही है. बेटी ने खिड़कियां और दरवाज़े बंद करवा दिए हैं. बाहर पटाखों की आवाज़ें एक पर एक सवार खिड़कियों को हिला रही हैं. छत पर बैठा था लेकिन पटाखों के धुंए की वजह से नीचे आकर…

जन्मदिन मुबारक हो कॉमरेड, तुम जो काम हमारे लिए छोड़ गए थे, हम पूरा नहीं कर पाए

खुशबू शर्मा प्रिय कॉमरेड, जानते हैं बहुत दुखी होगे तुम। तुम जो काम हमारे लिए छोड़ गए थे, हम पूरा नहीं कर पाए। तुम्हारे सपने आज भी अधूरे हैं। मेरी ही उम्र के रहे होंगे तुम जब अपने मुल्क के…

महात्मा गांधी: भारत तभी आजाद होगा जब उसके एक-एक आदमी का डर खत्म हो जाएगा

‘गांधीजी’ शब्द मैंने पहली बार कब सुना, यह बता पाना नामुमकिन है. जैसे कि और भी बहुत सी संज्ञाओं के बारे में मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि वे पहली बार कब मेरे स्मृतिपटल पर अंकित हुईं. यानी मेरे लिए…

आदमी भेड़ नहीं होता, जिसदिन लोगों को यह अहसास हो जाएगा, भेड़ों की तरह हांकते गड़रिए भाग खड़े होंगे

हेमंत कुमार झा आबादी के अधिकतर लोग हर युग में भेड़ ही रहे हैं। यह तो युग का नेतृत्व होता है जो उन्हें आईना दिखाता है, राह दिखाता है और फिर…भेड़ों को आदमी बनने की प्रेरणा देता है। युग और…

यह किसी दलित की लाश नहीं है, बल्कि इस समाज की अर्थी है

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में दलितों को अंतिम संस्कार के लिए एक शव पुल से नीचे लटकाकर उतारना पड़ा, क्योंकि खुद को अगड़ी जाति मानने वाले लोगों ने आगे जाने की इजाजत नहीं दी. यह घटना 17 अगस्त की है,…

पी. चिदंबरम: भ्रष्टाचार के बहाने मज़लूमो की हाय का शिकार, गिरफ्तार हुए तो इनके चेहरे खिल उठे

अन्सार इन्दौरी चौबीस घंटे से अधिक हाई प्रोफइल ड्रामे के बाद सीबीआई ने बुधवार को भारत के पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया। ये वही पी. चिदंबरम हैं जिनका अपने ज़माने में सोचना था कि हमारे यहां आतंकवाद…

कश्मीर में विनोबा

अव्यक्त 22 मई, 1959 को विनोबा के पैर कश्मीर की धरती को अपने पदचापों से तरंगित कर रहे थे। कश्मीर में विनोबा की पदयात्रा लगातार चार महीनों तक चली थी। कश्मीर में प्रवेश करने से पहले उन्होंने कहा था- “मैं…

बीबीसी की जातिवादी व्यवस्था को उखाड़कर रहेगें, मगर महिलाओं पर बिलो दी बेल्ट हमले सरासर गलत

ज्योति जाटव कई दिनों से बीबीसी हिंदी में महिला पत्रकार को निकाले जाने के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक अभियान चल रहा है. सबसे पहले तो मैं इस अभियान का समर्थन करती हूं, क्योंकि बहुजन समाज को जब तक मीडिया…

भू-लुटेरों की पत्नियाँ क्या करें!

अव्यक्त संलग्न तस्वीरें उस दौर की हैं जब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहुँचे गोरे वहाँ के आदिवासियों का अपनी मनमर्जी से ‘शिकार’ करते थे। लेकिन पहली तस्वीर में देखनेवाली बात है बग्घी से झाँकती गोरे की निष्ठुर पत्नी का चेहरा।…

नफरत ने कभी सुखद परिणाम नहीं दिया है, सिवाय बर्बादी, दुख, हिंसा, पीड़ा और अमानवीयता के

कृष्णकांत “नफ़रत की नींव पर तैयार हो रहा यह नया देश तभी तक ज़िंदा रहेगा जब तक यह नफ़रत जिंदा रहेगी, जब बंटवारे की यह आग ठंडी पड़ने लगेगी तो यह नया देश भी अलग-अलग टुकड़ों में बंटने लगेगा.” यह…