लोकवाणी

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समाज

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

एक पत्रकार होने के नाते आप खुद को न्यूज़ साइकल से दूर नहीं रख पाते। हर दिन की शुरुआत भी खबरों से ही होती है।  उस रोज़ पहली खबर जिसपर नज़र पड़ी वह थी हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर के सारे…

हैदराबाद रेप केस: कानून के राज में एनकाउंटर को किसी भी तरह से इंसाफ नहीं कहा जा सकता!

ज्योति जाटव हैदराबाद बलात्कार कांड के चारों दरिंदों को पुलिस ने ‘एनकाउंटर’ में मार गिराया। तेलंगाना पुलिस के इस कारनामे की आमतौर पर तारीफ हो रही है, जो स्वाभाविक तो है लेकिन यह तारीफ हमारी समूची न्याय व्यवस्था पर एक…

धर्म, विपक्ष या संवेदनशील नागरिकों को गाली देने वाले लोग रेप पीड़ितों को कैसे इंसाफ दिलवाएंगे?

महेंद्र सिंह निर्भया रेप के बाद लोगों ने किसी फिल्म, धर्म, पत्रकार, यूनिवर्सिटी या विपक्ष के ख़िलाफ़ प्रदर्शन नहीं किया था। लोगों ने उस वक़्त की कांग्रेस सरकार को गालियां दी थी। राष्ट्रपति के दरवाज़े पर लात मारी थी। देश…

तथाकथित महान संस्कारों की असलियत यही है कि भ्रष्टाचार हमारे समाज की रग-रग में दौड़ता है

प्रेम शुक्ल फ़तेहपुर सीकरी गया तो क़िले का अस्तबल दिखाते हुये गाइड बताने लगा कि यहाँ से ही सबसे पहले अकबर ने घोड़ों पर मुहर लगाने की शुरुआत की थी। वज़ह पूछने पर वो इससे ज़्यादा कुछ नहीं बता पाया…

छठ टोकरा ढोते रवीश कुमार

सिर पर अंधश्रद्धा का टोकरा ढोते रवीश कुमार की छवि की ‘टीआरपी’ अपील ज़ोरदार है। गाँव-ग्रामीण अभिभूत हैं। बिहार-ईस्ट यूपी के छठी दोस्त फ़िदा हुए जा रहे हैं। कोई उनके श्रमसाध्य भारोत्तोलन की प्रशंसा कर रहा है तो कोई उनकी…

दुर्गा पूजा में राम की जयकार के क्या मायने हैं?

अपूर्वानंद विजयादशमी बीत रही है. बेटी ने खिड़कियां और दरवाज़े बंद करवा दिए हैं. बाहर पटाखों की आवाज़ें एक पर एक सवार खिड़कियों को हिला रही हैं. छत पर बैठा था लेकिन पटाखों के धुंए की वजह से नीचे आकर…

जन्मदिन मुबारक हो कॉमरेड, तुम जो काम हमारे लिए छोड़ गए थे, हम पूरा नहीं कर पाए

खुशबू शर्मा प्रिय कॉमरेड, जानते हैं बहुत दुखी होगे तुम। तुम जो काम हमारे लिए छोड़ गए थे, हम पूरा नहीं कर पाए। तुम्हारे सपने आज भी अधूरे हैं। मेरी ही उम्र के रहे होंगे तुम जब अपने मुल्क के…

महात्मा गांधी: भारत तभी आजाद होगा जब उसके एक-एक आदमी का डर खत्म हो जाएगा

‘गांधीजी’ शब्द मैंने पहली बार कब सुना, यह बता पाना नामुमकिन है. जैसे कि और भी बहुत सी संज्ञाओं के बारे में मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि वे पहली बार कब मेरे स्मृतिपटल पर अंकित हुईं. यानी मेरे लिए…

आदमी भेड़ नहीं होता, जिसदिन लोगों को यह अहसास हो जाएगा, भेड़ों की तरह हांकते गड़रिए भाग खड़े होंगे

हेमंत कुमार झा आबादी के अधिकतर लोग हर युग में भेड़ ही रहे हैं। यह तो युग का नेतृत्व होता है जो उन्हें आईना दिखाता है, राह दिखाता है और फिर…भेड़ों को आदमी बनने की प्रेरणा देता है। युग और…

यह किसी दलित की लाश नहीं है, बल्कि इस समाज की अर्थी है

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में दलितों को अंतिम संस्कार के लिए एक शव पुल से नीचे लटकाकर उतारना पड़ा, क्योंकि खुद को अगड़ी जाति मानने वाले लोगों ने आगे जाने की इजाजत नहीं दी. यह घटना 17 अगस्त की है,…